Home उत्तर प्रदेश प्राइवेट बिना परमिट डग्गामार बस पारा में दुर्घटनाग्रस्त, डेढ़ दर्जन यात्री गंभीर

प्राइवेट बिना परमिट डग्गामार बस पारा में दुर्घटनाग्रस्त, डेढ़ दर्जन यात्री गंभीर

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लखनऊ। परिवहन विभाग के चेकिंग दलों की लापरवाही का यह आलम है कि डग्गामार बसें बेखौफ सवारियों को ढो रहे हैं। बिना परमिट प्राइवेट बसों की धरपकड़ तो दूर इन बसों पर किसी का भी लगाम नहीं है। यही वजह है कि ये बसें आए दिन सड़क दुर्घटनाएं कर रही हैं। जिसमें यात्रियों की मौत होना या गंभीर रूप से घायल होना आम बात हो गई है। जिसका जिम्मेदार परिवहन महकमा है। बावजूद लखनऊ से दिल्ली के बीच संचालित डग्गामार बसों को बंद करने से अधिकारी दूर भाग रहे है।
गुरुवार सुबह दिल्ली से लौट रही प्राइवेट बिना परमिट डग्गामार पारा के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई हैं। जिसमें एक बच्चें को जान गंवानी पड़ी, वहीं डेढ़ दर्जन यात्री गंभीर रूप से घायल हुए। मौके से बस छोड़ चालक और खलासी फरार हो गए। बस नंबर यूपी 51 एटी 6694 की पड़ताल की गई तो पता चला ये बस बिना परमिट लखनऊ दिल्ली के बीच दौड़ रही हैं। इस रूट पर रोजाना 40 बसें वाया आगरा एक्सप्रेस के रास्ते यात्रियों को दिल्ली बाकी अन्य शहरों के बीच 47 बसों से संचालित हो रही हैं।
शहर भर में डग्गामार बसों का बिछा है जाल
राजधानी लखनऊ के चारबाग, कैसरबाग, आलमबाग, अवध चौराहा, शहीद पथ, कमता चौराहा, पॉलीटेक्निक चौराहा के आसपास डग्गामार बसों ने अपना जाल बिछा रखा है। डग्गामार वाहनों में जीप मार्शल से लेकर एसी, नॉन एसी प्राइवेट बसें शामिल हैं। इन बसों का संचालन परिवहन विभाग, पुलिस के गठजोड़ से संचालित हो रहा है। जिसे पकड़कर बंद करने में विभागीय अफसर दिलचस्पी नहीं ले रहे है।
डग्गामार बसों की खास बात यह है कि कम किराये के साथ समय की बचत है। इसी का लालच देकर डग्गामार बस मालिक सवारियों के जान से खिलवाड़ कर रहे है। यहीं नहीं डग्गामार बसों में ऑनलाइन सीटें बुक हो रही हैं। सवारियों को ये बसें कहां से मिलेंगी इसकी जानकारी मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजकर दिया जा रहा है। उदाहरण स्वरूप लखनऊ से दिल्ली रोडवेज बस का किराय 1200 से 1700 के बीच है और आठ से ग्यारह घंटे का समय लगता है। ऐसे में डग्गामार बसों का किराया 1000 से कम और समय सात से आठ घंटे लगते है।
एआरटीओ प्रवर्तन संजीव गुप्ता बताते है कि डग्गामार वाहनों के खिलाफ रूटीन में चेकिंग की जाती हैं। बसों को पकड़कर थाने में बंद किया जाता है। जब ये जुर्माना जमा करके देते है तो उन्हें छोड़ दिया जाता है। ऐसे में बिना परमिट डग्गामार बसों से कोई हादसा होता है तो विभाग के साथ बस मालिक की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

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