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UP में अयोध्या सहित कई जगह कम वोटिंग से भाजपा में ज्यादा मायूसी

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनावों के पहले चरण में कम वोटिंग ने भाजपा की धडक़नें बढ़ा दी हैं। मुख्यमंत्री से लेकर केन्द्रीय मंत्रियों तक किए गए धुआंधार प्रचार के बावजूद मतदान का प्रतिशत इतना कम होने पर अन्य दलों की अपेक्षा भाजपा खेमें में कुछ ज्यादा मायूसी है। हालांकि यह चिंता अकेले भाजपा की नहीं है इससे बाकी दलों में बैचेनी कम नहीं है। क्योंकि अन्य दलों की अपेक्षा यह चुनाव भाजपा के लिए कुछ ज्यादा ही नाक का सवाल बने हुए है।

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निकाय चुनाव में सपाा व बसपा के किसी शीर्ष नेता ने प्रचार अभियान में हिस्सा नहीं लिया। जबकि केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से लेकर केन्द्र के कई अन्य मंत्रियों ने इस चुनाव में भाजपा के लिए बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। के न्द्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के नाते नगर निगमों में भाजपा के सामने सबसे ज्यादा चुनौती सीटों में वृद्वि के साथ पूर्व की स्थिति बनाए रखने की है। दरअसल निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मतदान प्रतिशत में बढ़ोत्तरी की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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पहले चरण में पांच नगर निगमों सहित 230 निकायों में हुए चुनाव मेें सिर्फ लगभग 55 प्रतिशत वोटिंग हुई। जिस राम के मुद्ïदे को  लेकर भाजपा की राजनीति केन्द्रित रहीं उन्हीं की जन्मभूमि अयोध्या में 49 प्रतिशत वोट ही पड़े। हालांकि अयोध्या में पिछले एक महीने में सीएम के दो बड़े कार्यक्रम हुए बावजूद इसके वहां मतदान का प्रतिशत भाजपा के अनुसार उतना नहीं रहा जितनी उसे उम्मीद थी। भाजपा सरकार ने अयोध्या को नगर निगम बनाया है। वहां दीवाली मनाकर निकाय चुनाव के लिए पहले ही माहौल बनाया था।

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खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में दीवाली मना कर अयोध्या के चौमुखे विकास का वादा किया था। इतना ही नही, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बतौर पार्टी के स्टार प्रचारक अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरूआत भी अयोध्या से की थी। मिली जानकारी के अनुसार फैजाबाद के अन्य नगर पंचायतों में अच्छा मतदान होने और अयोध्या नगर निगम के लिए कम वोट पडऩे से भाजपा की धडक़नें बढ़ गई है। जबकि अयोध्या नगर निगम बनने से वोटरों की संख्या कहीं ज्यादा हो गई है। इसका फायदा शायद भाजपा नहीं उठा पाई।

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यूपी में मतदान का टे्रेंड यही बताता है कि जब वोट प्रतिशत ज्यादा हो तो किसी भी पार्टी को ज्यादा सीटें एकमुश्त मिल रही है। उसकी हवा है। पिछले कई चुनावों में यह देखा गया है कि ज्यादा वोट प्रतिशत होने का लाभ भाजपा को मिला है। अयोध्या में भारी जीत से भाजपा को कर्ई संदेश देने का मौका मिलता। इसलिए इस बार अयोध्या में कम प्रतिशत से भाजपा नेताओं की धडक़नें बढ़ गई हैंं। पहले चरण में हुए चुनाव में कानपुर और आगरा में भी कमोबेश कम मतदान ने भाजपा की नींद उड़ा दी है।

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आगरा में इस बार 42 प्रतिशत वोट पड़े। हालांकि आगरा में पिछली बार भी लगभग 36 प्रतिशत वोट पड़े थे। इस बार वोट प्रतिशत भाजपा के पक्ष में बढऩे की उत्मीद थी। लेकिन ऐसा रूझान नहीं लग रहा है। ऐसी ही स्थिति कानपुर की भी है। पिछले लोकसभा चुनावों से कानपुर में भाजपा ने अपनी मजबूत स्थिति बनाई थी लेकिन निकाय चुनाव में यहां भी नगर निगम में वोट प्रतिशत कम होने से भाजपा सांसत में है। वहीं कम मतदान को लेकर अन्य विपक्षी दल भी बहुत ज्यादा आश्वस्त नहीं हैं|

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