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पारा पुलिस का नया कारनामा, घर से उठाया, नहर तिराहे के पास दिखाई गिरफ्तारी, जामा तलाशी में दिखाया 300 ग्राम गांजा

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लखनऊ | आचार संहिता लगते ही पुलिस बेलगाम हो गई है। सारे नियमों को ताक पर रखकर पुलिस खुलेआम अराजकता पर उतर आई है। मामला पारा थाने का है जहां तीन बच्चों के पिता को पुलिस वारंटी बता कर उसे घर से उठा लाई। 2 दिन थाने में बैठाने के बाद 300 ग्राम गांजा लगाकर जेल भेज दिया। पुलिस द्वारा घर से उठाए जाने का सबूत घर के पास लगे सीसीटीवी फुटेज कैद हो गया है। पुलिस ने अपने आप को फंसता देख आनन-फानन में एक अन्य व्यक्ति के साथ युवक को दिखा कर एनडीपीएस में जेल भेज दिया।

मिली जानकारी अनुसार चौकी इंचार्ज विजय चतुर्वेदी ने भट्टामऊ के रहने वाले अर्जुन रावत पुत्र रामदयाल रावत को उसके घर रविवार को गिरफ्तार किया और दो दिनों तक थाने में बैठाए रखा। इस दौरान अर्जुन रावत के पिता रामदयाल से चौकी इंचार्ज द्वारा ₹30000 की मांग की गई। जब राम दयाल ने ₹30000 देने में असमर्थता दिखाई तो चौकी इंचार्ज ने उसे जेल भेज दिया। वहीं दूसरे युवक संजय को पुलिस ने एक होटल से गिरफ्तार जिसके पास 300 ग्राम गांजा दिखाया गया। अब इसे इत्तेफाक कहे या पुलिस की चाल दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने दोनों के पास तीन-तीन सौ ग्राम गांजा दिखाया। सूत्रों की माने तो पुलिस ने माल खाना इंचार्ज से मिलकर 620 ग्राम गांजा की व्यवस्था की और झूठी फर्द बनाकर दोनों युवकों को जेल भेज दिया।
चौकी इंन्चार्ज विजय चतुर्वेदी , उपनिरीक्षक अशोक कुमार , सिपाही मनोज कुमार, सिपाही विभोर कुमार को बुद्धेश्वर चौराहा पर वाहन चेकिंग के दौरान मुखबिर द्वारा सूचना मिली की तीन किलो मीटर दूर नहर पुलिया के पास डूडा कालोनी से पैदल फतेहपुर गांव में गांजा बेचने के लिए दो व्यक्ति जा रहे है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए संजय और अर्जुन को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान अर्जुन के पास से 320 ग्राम गांजा और संजय के पास से 300 ग्राम गांजा बरामद हुआ। लेकिन पुलिस द्वारा बनाए गए इस प्रेस नोट में काफी झोलझाल है। इस मामले में अर्जुन के पिता और उनके मोहल्ले वालों का कहना है कि अर्जुन को रविवार की सुबह उसके घर से गिरफ्तार किया गया। परिजनों के पूछने पर पुलिस वालों ने बताया कि इसका वारंट है, इसलिए इसे थाने ले जा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि पूर्व में अर्जुन रावत मारपीट के आरोप में जेल जा चुका है। इसलिए उन्होंने सोचा कि हो सकता है कोई वारंट आया हो। पर 2 दिन बाद भी पुलिस द्वारा सही जानकारी ना दिए जाने पर उन्होंने इस संबंध में पार्षद ताराचंद रावत सहित अन्य लोगों को जानकारी दी। रामदयाल के अनुसार घर से पुलिस द्वारा अर्जुन को उठाए जाने की फुटेज घर के पास लगे सीसीटीवी में कैद हो गई है। रामदयाल का कहना है कि उनके बेटे को फर्जी तरीके से जेल भेजा गया है। उनका बेटा लोहार का काम करता है, उसके तीन बच्चे हैं। मेरे पास ₹30000 नहीं थे। इसलिए मेरे बच्चे को पुलिस वालों ने जेल भेज दिया। अगर मेरे पास पैसा होता तो आज मेरा बेटा जेल ना जाता।
इस सम्बंध में एसपी पूर्वी रमेश चंद रावत से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अगर पुलिस द्वारा उसे जेल भेजा गया है तो सही भेजा गया होगा। अगर गलत भेजा गया होगा तो उन पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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