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PPP मॉडल (पैसा, पब्लिसिटी और प्रमोशन) के नाम पर कर रही लखनऊ पुलिस एनकाउंटर!

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लखनऊ। लखनऊ पुलिस का इकबाल दिन पर दिन खत्म होता जा रहा है। लखनऊ पुलिस (ट्रिपल पी) यानि पैसा, पब्लिसिटी और प्रमोशन के चक्कर में फर्जी एनकाउंटर करने से भी बाज नहीं आ रही है। आरोप है कि बीते दिनों काकोरी थाना क्षेत्र में हुए एनकाउंटर को बदमाशों के परिजनों ने फर्जी ठहराया है। उनका आरोप है कि उनके बच्चों को 2 दिन पहले ही पुलिस ने उठा लिया था| उसके बाद एनकाउंटर दिखाया गया। अगर सच्चाई जाननी हो तो एनकाउंटर में शामिल 13 पुलिसकर्मियों का सर्विलांस टीम से उनकी दो दिन पहले की लोकेशन की जानकारी कर ली जाए। उनके बच्चे अपराधी थे तो घर से ही उठाकर क्यों नहीं गिरफ्तारी दिखाई गई। फर्जी एनकाउंटर दिखाकर वाहवाही लूटने से क्या फायदा और उनके बच्चे के पैर में गोली भी मार दी।

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शुभकरण के भाई बबलू यादव ने बताया कि उसका भाई जमानत पर था और खेती किसानी कर रहा था। बीते 2 दिन पहले पुलिस वाले आए थे और उसका वारंटी होने की बात कहकर चले गए और उसी रात पुलिस वाले दीवार फांदकर घर में घुसे व उसके बेटे को गिरफ्तार कर ले गए। बबलू के परिजनों ने शोर मचाया| पुलिस द्वारा शुभकरण की हत्या की आशंका के चलते सुबह 6:30 बजे हजरतगंज स्थित जीपीओ जाकर शिकायती पत्र स्पीड पोस्ट किया। 2 घंटे बाद पता चला कि पुलिस ने शुभकरण को काकोरी इलाके में जाकर पैर में गोली मारकर घायल कर दिया।

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ठीक उसी प्रकार वीरेंद्र पुत्र मदनलाल निवासी हरगांव सीतापुर व संजय शुक्ला पुत्र रामाश्रय निवासी रकाबगंज के परिजनों ने दबी आवाज में बताया कि उनके बच्चे को 2 दिन पहले पुलिस उठा ले गई थी| उसके बाद एनकाउंटर की सूचना मिली। यह जानकर आपको बहुत ही हैरानी होगी कि तीनों अपराधियों के निवास थाना क्षेत्र में कोई भी अपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है। इस संबंध में संस्था ह्यूमन राइट्स मानिटरिंग फोरम ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत करते हुए कहा है कि वह मानते हैं कि तीनों पुराने अपराधी हैं। उनके ऊपर कई मामले चल रहे हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि पुलिस ने अगर उन्हें 2 दिन पहले ही उठाया था तो फर्जी एनकाउंटर दिखा कर वाहवाही लूटने का क्या फायदा। क्या पुलिस (ट्रिपल पी) का फायदा उठाना चाहती हैं।

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जबरन घर से उठाकर लाये थे पुलिसकर्मी
उन्होंने बताया कि आज तड़के भोर में लगभग 2 से 3 के बीच तीन गाडियों से लगभग 15/16 पुलिस वाले घर का चाहरदीवारी फादकर गेट खोले फिर सभी पुलिस वाले घर के अन्दर आ गये और उनके लड़के को जबरन ले जाने लगे। तब घरवालो ने लड़के को छुडाने के लिए पुलिस वालो से छीनाझपटी हो गई। जिसमें पुलिस वालो का बैच बिल्ला वहीं गिर गया। जिस पर पुलिस वाले भड़क गये और शुभकरण के ऊपर रिवाल्वर तानकर घरवालो से बोले की हमें इसे ले जाने दो नहीं तो यही पर गोली मार देगें। पुलिस की धमकी से परिवार वाले डरकर पीछे हट गये।

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परिवार के पीछे हटने पर पुलिस वाले शुभकरण और उसके नई अपाचे गाडी उठाकर ले जाने लगें। पुलिस शुभकरण को लेकर भागने के चक्कर में पुलिस की 100 न. की सफेद रंग की इनोवा पीड़ित के घर के दिवाल पर जोरदार टक्कर लग गया। जिससे इनोवा की बम्फर और साइड सीसा टूटकर वहीं गिर गया और दिवाल टेडी हो गयीं लेकिन पुलिस रुके नहीं भाग गयें। फिर पीड़ित परिवार ने 3 बजे के लगभग 100 न पर फोन किया तो वहां से मडियांव थाने पर जाने को कहा गया। फिर पीड़ित परिवार थाने पर गये वहां बैठे मुंशी ने बताया कि यहां पर शुभकरण को नहीं लाया गया है।

इस संबंध में SP पूर्वी सर्वेश कुमार मिश्रा का कहना है कि पुलिस पर आरोप प्रत्यारोप लगते रहते हैं । अगर इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की तरफ से कोई शिकायती पत्र आएगा तो पुलिस उसका जवाब देगी।

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