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Lucknow में तैनात रहें आईपीएस अफसर आर. के. चतुर्वेदी को मिला सेवा विस्तार

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लखनऊ। प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ जहां भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए प्रदेश के निकम्मे और नाकारा अफसरों को जबरन रिटायरमेंट देकर छुट्टी कर रही है तो वहीं दूसरी ओर अच्छा कार्य करने वाले अफसरों को सेवा विस्तार भी दे रही है।

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यूपी पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रामकृष्ण चतुर्वेदी को तीन महीने का एक्सटेंशन दे दिया है। 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी आरके चतुर्वेदी का कार्यकाल आज खत्म हो रहा था। लेकिन उनके बेहतर कार्यकुशलता और दक्षता देखते हुए सरकार ने उनका कार्यकाल बढ़ाने का फैसला लिया है।

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आर. के. चतुर्वेदी इस समय प्रदेश में इंटेलीजेंस हेड क्वाटर्र आईजी साम्प्रदायिक के पद में तैनात हैं। वह अपने सेवा काल के दौरान प्रदेश के तराई क्षेत्र में भी तैनात रहे जहां उन्होंने आतंकवाद और हिंसा पर लगाम लगाकर कानून-व्यवस्था की स्थापना की।

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अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख के लिए पहचाने जाने वाले श्री चतुर्वेदी आम जनता की सहायता के लिए हर समय तैयार रहते थे। जिसके लिए उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। यह पहला अवसर है जब डीजीपी के बाद किसी आईजी अधिकारी को सेवा विस्तार मिला है। इससे पहले प्रदेश पुलिस के मुखिया (डीजीपी) सुलखान सिंह को प्रदेश सरकार ने सेवा विस्तार दिया है।

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अभियोजन विभाग में तीन विभागों का अतिरिक्त कार्यभार
आरके चतुर्वेदी वर्तमान में अगस्त 2016 से आईजी (सीआई) यानी साम्प्रदायिक अभिसूचना के पद पर कार्योरत हैं। इसके अलावा इनके पास आईजी वीके और अभिसूचना का भी अतिरिक्त प्रभार है। आरके चतुर्वेदी अभिसूचना विभाग के सुदृढ़ीकरण और प्रभावी बनाने के लिए सीएम योगी के निर्देशों के अनुपालन में हो रही प्रक्रिया के प्रभारी एवं नोडल अधिकारी भी हैं। इस प्रकार चतुर्वेदी अभिसूचना विभाग के तीन महत्वपूर्ण पदों का कार्यभार अकेले ही देख रहे हैं।
आरके चतुर्वेदी को 1992 में वीरता के पुलिस मेडल मिला
लखीमपुरखीरी में 3 साल के बतौर सीओ आरके चतुर्वेदी ने बब्बर खालसा आतंकी संगठन की कमर तोड़ दी थी। इन्होंने एक दुर्दान्त आतंकवादी को मार गिराया था।जिसके लिए इनको 1992 में वीरता के पुलिस मेडल मिला था।
प्रधानमंत्री का जीवन रक्षक पदक से हो चुके हैं सम्मानित
नोएडा में तैनाती के दौरान कुछ लोगों की जान बचाने के लिए इनको प्रधानमंत्री का जीवन रक्षक पदक से सम्मानित हो चुके हैं। यही नहीं 2005 में चंदौली में नक्सलवाद की इन्होंने कदम तोड़ दी थी। पीलीभीत, सुल्तानपुर, लखनऊ, मथुरा, एटा, फैजाबद, इटावा और कई जिलों में बतौर कप्तान भी काम कर चुके हैं।
आर के चतुर्वेदी के अनुभव को काम में लाना चाहती है सरकार
आर के चतुर्वेदी के पास फील्ड और अभिसूचना का वृहद एवं बहुआयामी अनुभव प्राप्त है। इसके अलावा पुलिसिंग के विशेषज्ञ, लोकप्रिय अधिकारी हैं। इनका 90 फीसदी कार्यकाल अत्यंत संवेदनशील स्थानों और पदों पर कार्यरत रहे हैं। जिसका लाभ योगी सरकार लेना चाहती है। इसलिए सरकार सबसे कीमती अधिकारी को इतनी जल्दी सेवा से मुक्ति नहीं देना चाहती है। इनके अनुभव को सरकार पुलिसिंग को बेहतर बनाने में इस्तेमाल करना चाहती है।

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