Home क्राइम कंधों पर टांग कर आरोपी को जिला कारागार लेकर पहुंची हरदोई...

कंधों पर टांग कर आरोपी को जिला कारागार लेकर पहुंची हरदोई पुलिस

1140
0
SHARE

मारपीट के मामले में घायल हुए था युवक, जेल प्रशासन ने लेने से किया इंकार फिर भेजा अस्पताल, जिला अस्पताल के कई डॉक्टरों ने इधर से उधर किया रिफर, न्यूरो सर्जन के लिए रिफर के बाद भेजा गया लखनऊ
माधौगंज थाना क्षेत्र का मामला
लखनऊ | यूपी के हरदोई जिला के माधौगंज थाने की पुलिस का अमानवीय चेहरा देखने को मिला। जब एक पीड़ित युवक को पहले तो आरोपी बनाया गया। फिर जब मामला तूल पकड़ने लगा तो जिला अस्पताल से उठाकर उसे जेल भेजने की कोशिश की गई। लेकिन आरोपी मरीज की हालत नाजुक देखकर जिला कारगार के डॉक्टर ने उसे इलाज के लिए लौटा दिया। उस दौरान विडियो बना रहें पत्रकारों से भी दरोगा सुरेन्द्र सिंह ने भी अभद्रता की और उनके कैमरे छिनने का प्रयास किया| जानकारी के लिए बता दे की इस मामले की जाँच सुरेन्द्र सिंह ही कर रहे है|

झारखंड में नाबालिग से गैंगरेप कर जिंदा जलाया, पंचायत ने लगाई 50 हजार की कीमत

बताया जा रहा है कि पिटाई के कारण युवक का आधा शरीर शून्य हो गया। पीड़ित के आधे शरीर ने काम करना बंद कर दिया।जब जेल के डॉक्टर ने मरीज को किसी न्यूरो से दिखने कि बात पर्चे में लिखी तो पुलिस की सारी चाल फेल हो गयी। क्योकि हरदोई में न्यूरो सर्जन का आभाव है इसके चलते मजबूरन मरीज को लखनऊ रेफर करना पड़ा। अब पुलिस पीड़ित के साथ लखनऊ चली तो गई लेकिन अगर पीड़ित कि मौत हो गई तो उन्नाव कांड की तरह हरदोई पुलिस की भी फजीहत तय मानी जा रही है। हालांकि ग्रामीणों ने पुलिस पर झूठे मुक़दमे में फंसाने का आरोप लगाया है। इस मामले में एसपी विपिन कुमार का कहना है कि दोनों पक्षों से मामला दर्ज है। लेकिन ऐसी कौन सी मजबूरी पुलिस के सामने थी जो एक लाचार को गम्भीर हालत में होने के बावजूद कंधे पर टांग कर जेल भेजना जरूरी पड़ा इसका जवाब किसी के पास नही है।

काकोरी और पीजीआई पोस्मार्टम रिपोर्ट एक सामान : एक में आरोपी गिरफ्तार, दूसरे में आरोपी पुलिसवालों की नहीं हुई गिरफ्तारी
दरसल मामला हरदोई के माधौगंज थाना के असमा मजरा पहुतेरा का है। यहां के ग्रामीण खुशीराम ने पुलिस पर झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया है। पीड़ित के मुताबिक उसे ही दबंगों ने पीटा। जब उसने शिकायत की तो पुलिस ने उसे ऊपर ही दबंगोें की ओर से छेड़खानी का मामला दर्ज कर आरोपी बना दिया। जब मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा तो इस पर पुलिस कर्मी उसे जिला अस्पताल से जिला कारगार भेजने के लिए एक आटो रिक्शा पर लादकर ले गए। जब उसके पैर जमीन नहीं लगे तो पुलिस कर्मी उसे दोनों ओर से कंधों पर लादकर जिला कारगार के अंदर दाखिल हुए। लेकिन वहां पर जब डॉक्टर ने आरोपी खुशीराम की नाजुक हालत देखी तो जिला अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया।

अधेड़ ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर की आत्महत्या

जेल के अधीक्षक ने ऐसी हालत में जेल के अंदर रखने से इंकार कर दिया इस पर पुलिस कर्मियों दोबारा उसे मजबूरी में लाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहां से उसे लखनऊ रिफर कर दिया गया। एक बड़ा सवाल की आखिर ऐसी क्या बात थी जो पुलिस वालो को उसे जेल में भजने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही थी। विडियो में कैद ऐसी हरकत अपने आप में सवाल खड़ा कर रही है। खुशीराम को पहले जिला अस्पताल के वार्ड नम्बर चार में भर्ती किया गया। जहां पर सर्जन डॉक्टर ने उसे देखने के बाद हड्डी विभाग के डॉक्टर के लिए रेफर किया। जब हड्डी विभाग के डॉक्टर ने उसे देखा तो उन्होंने लखनऊ रेफर करने के बजाए न्यूरोफिजीशियन के लिए लिखा है। पीड़ितों के अनुसार हर कोई अब उससे पल्ला झाड़ रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या पीड़ित को पुलिस न्याय दे पाती है या फिर खुद को बेगुनाह बता था पीड़ित ही जेल जायेगा, ये देखने वाली बात होगी।

बिहार में बस हादसा के दौरान 27 लोग जिंदा जलकर मौत

फिलहाल इस पूरे मामले में इस्पेक्टर एसके सोनकर का कहना है कि 29 तारीख को खुशीराम ने दिनेश की लड़की से छेड़छाड़ किया था। जहां शोर शराबा होने पर दर्जनों की भीड़ इकट्ठा हो गई और लोगों ने आरोपी खुशीराम को जमकर पिटाई कर दी। पिटाई से घायल खुशीराम को थाने लाया गया जहां मेडिकल कराकर जेल भेजा गया। जेल अधिकारियों ने जेल के अंदर लेने के बाद पुनः इलाज के लिए जिला अस्पताल भेज दिया| जिसके बाद 2 तारीख को उन्हें डिस्चार्ज किया गया फिर कुछ और जांच के लिए उन्हें मेडिकल कॉलेज लखनऊ के लिए रेफर किया गया। खुशीराम की पत्नी की तहरीर पर उन से मारपीट करने वाले आरोपी दिनेश, कौशल, रमाकांत व प्रवीण के खिलाफ मारपीट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस्पेक्टर सोनकर का कहना है कि दिनेश ने तहरीर में लिखा भी है कि मेरे द्वारा एक खुशीराम को मारा पीटा गया है। अब सवाल यह उठता है कि इतनी बुरी तरह पिटाई के बावजूद भी पुलिस ने मामला सिर्फ मारपीट की धाराओं में दर्ज किया है आखिर क्यों? जबकि आरोपी खुशीराम को जान से मारने का पूर्ण रुप से प्रयास किया गया है|

राज्यपाल को पत्र प्रेषित कर ‘प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार’ के लिए नामांकन मांगे

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here