Home क्राइम लचर तफ्तीश से दफन हो रहे हैं राजधानी में हुए हत्याओं के...

लचर तफ्तीश से दफन हो रहे हैं राजधानी में हुए हत्याओं के राज

229
0
SHARE

लखनऊ। महिला सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता में है, लेकिन राजधानी पुलिस उसमें पलीता लगाने में जुटी है। गोसाईंगंज में महिला की हत्या करके सूटकेस में शव मिलने की वारदात का अभी राजफाश भी नहीं हुआ और कृष्णानगर में बदमाशों ने एक और महिला का शव टुकड़ों में फेंककर पुलिस को एक बार फिर खुली चुनौती दी है। घटना से कृष्णानगर पुलिस की एक बार फिर नाकामी साबित हुई।
पुलिस के लिए यह कोई पहला मामला नहीं है। बीते वर्षो में हुई महिलाओं के साथ ऐसी कई बड़ी वारदातें लचर तफ्तीश के चलते ठंडे बस्ते में ही हैं। पुलिस अभी तक महिलाओं की शिनाख्त तक नहीं कर सकी। जीपीएस सिस्टम से लैस वाहन, विश्वस्तरीय मॉर्डन पुलिस कंट्रोल रूम, अत्याधुनिक हथियार और जगह-जगह सीसी कैमरे से निगरानी करने के बावजूद अगर पुलिस अपराधियों तक नहीं पहुंच पा रही। सरकार द्वारा पुलिस को दिए जाने वाला लाभ भी व्यर्थ साबित हो रहा है। राज्य सरकार पुलिस को हाईटेक करने में जुटी है जबकि हाईटेक पुलिस तफ्तीश के नाम पर मनमाना रवैया अपनाते हुए मामलों में एफआर लगा रही है।
मोहनलालगंज कांड और गौरी हत्याकांड से पुलिस पहले ही करा चुकी है फजीहत
मोहनलालगंज के बलसिंहखेड़ा स्थित प्राथमिक विद्यालय में 16 जुलाई 2014 को महिला की दरिंदगी के बाद हत्या कर दी गई थी। उसका निर्वस्त्र शव स्कूल परिसर से बरामद हुआ। पुलिस ने मुख्य हत्यारोपित गार्ड रामसेवक को जेल भेजा था। खुलासे पर भी कई सवाल उठे। इसी तरह गौरी हत्याकांड में भी पुलिस की खूब किरकिरी हुई थी। मामले में भी पुलिस ने हत्यारोपित हिमांशु और अनुज को गिरफ्तार कर राजफाश का दावा किया था, लेकिन हत्यारोपितों के घरवालों ने ही सीबीबाइ जांच की मांग कर पुलिस की पूरी थ्योरी पर सवाल उठा दिये थे। जबकि गौरी हत्याकांड में पीजीआई पुलिस ने ही आरी खरीद कर पूरे पूरे मामले को झूठा साबित कर दिया था।
स्टोरी कॉपी गूगल

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here