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मुकेश मनवानी हत्याकांड : पुलिस की भूमिका की हो जांच

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लखनऊ| नाका में होटल व्यापारी मुकेश मनवानी हत्याकांड में पीड़ित परिवार ने गुरुवार को एडीजी कानून एवं व्यवस्था आनन्द कुमार से मुलाकात की। परिवार की तरफ से नाका पुलिस की भूमिका की जांच कराये जाने की मांग करते हुए प्रार्थना पत्र दिया गया है।

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गुरुवार को मुकेश मनवानी के भाई विक्रम मनवानी एडीजी कानून व्यवस्था से मिले। उन्होंने 25 अगस्त 2017 को चारबाग की गुरुनानक मार्केट में हुए हत्याकांड में पुलिस द्वारा ढिलाई बरते जाने का आरोप लगाया। साथ ही नाका पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। विक्रम के मुताबिक उनके भाई की हत्या में नामजद आरोपितों के प्रति नाका पुलिस का रवैया शुरूआत से ही सहयोगात्मक रहा है। जिस वजह से उन्होंने मामले की जांच दूसरी जगह कराए जाने की मांग की थी। पर, उन्नाव के थाना सफीपुर से हुई जांच के दौरान राजेन्द्र सिंह दुआ की कॉल डिटेल निकाली गई तो इसमें राजेन्द्र दुआ की नाका इंस्पेक्टर परशुराम सिंह के बीच बातचीत होने की पुष्टि हुई है।

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विक्रम का कहना है कि इंस्पेक्टर और आरोपी के बीच लगातार हुई बातचीत की जांच होनी चाहिए। विक्रम ने यह भी आरोप लगाया कि नाका पुलिस जानबूझ कर हत्याकांड में नामजद आरोपितों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई नहीं कर रही है। सरेंडर करने के लिए की थी बात इंस्पेक्टर नाका परशुराम सिंह ने आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने बताया कि घटना के बाद उनकी राजेंद्र दुआ से बात हुई थी। इंस्पेक्टर के मुताबिक राजेंद्र चारबाग व्यापार मंडल का पदाधिकारी था और व्यापारियों की समस्याओं को लेकर नाका पुलिस के संपर्क में रहता था।

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पूर्व में भी उससे बात होती थी। घटना के बाद राजेंद्र ट्रामा सेंटर पहुंचा था। उस वक्त तक मामले में उसका नाम सामने नहीं आया था। उन्होंने बताया कि राजेंद्र ने आरोपितों की पैरवी भी की थी। जिस पर उच्च अधिकारियों के सामने ही उससे आरोपितों को हाजिर कराने में मदद करने के लिए कहा गया था। उनके मुताबिक घटना के कुछ घंटों बाद मुकेश के परिवार की तरफ से दी गई तहरीर में राजेंद्र सिंह दुआ को नामजद किया गया था। जिस पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुए पुलिस ने गिरफ्तारी की थी।

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मुकेश मनवानी हत्याकांड में सभी नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी नाका पुलिस ने ही की है। घटना के बाद राजेन्द्र दुआ ने मुख्य आरोपी की पैरवी में इंस्पेक्टर नाका परशुराम सिंह को फोन किया था। बातचीत के दौरान इंस्पेक्टर द्वारा उन पर सरेंडर का दबाव बनाया गया था। इसमें इंस्पेक्टर की भूमिका कहीं से भी गलत नहीं है।
दीपक कुमार एसएसपी, लखनऊ

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