Home लखनऊ हजारों रुपए का गबन करने पर ट्रैफिक सिपाही गिरफ्तार

हजारों रुपए का गबन करने पर ट्रैफिक सिपाही गिरफ्तार

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लखनऊ। ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर हजारों रुपए का जुर्माना लगा कर विभाग में कम रकम जमा करने वाले सिपाही धीरज कुमार को गिरफ्तार किया गया है। एसएसपी कलानिधि नैथानी के ट्रैफिक लाइन व ऑफिस निरीक्षण के बाद खामियां उजागर हुई थीं। इसी क्रम में एएसपी अभिषेक वर्मा ने दस्तावेज खंगाले तो सिपाही द्वारा की जा रही धांधली उजागर हुई। जिस पर सिपाही के खिलाफ कैंट कोतवाली में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई गई है। दो महीने में पचास मामले आए सामनेएएसपी अभिषेक वर्मा बुधवार को ट्रैफिल लाइन स्थित सीओ ट्रैफिक कार्यालय पहुंचे। उन्होंने चालान जमा किए जाने वाले दस्तावेज खंगाले तो कई खामियां मिली।
एएसपी ने बताया कि सीओ कार्यालय में तैनात सिपाही धीरज कुमार इंद्राणा से बीते दो महीने में जमा हुए चालान का रिकार्ड दिखाने के लिए कहा गया। इस पर सिपाही ने रजिस्टर जांच के लिए गए होने की बात कही। इस पर एएसपी ने अधिकारियों से पूछताछ करने की बात कही। जिसके बाद धीरज ने चालान शुल्क जमा किए जाने का रिकार्ड पेश कर दिया। एएसपी ने बताया कि 23 अगस्त से 15 नवम्बर के बीच का रिकार्ड देखा गया। उनके मुताबिक 50 मामले ऐसे मिले। जिसमें वाहन चालकों से अधिक रुपए लिए गए थे। पर, शमन शुल्क बुक में कम राशि लिखी गई थी। उनके मुताबिक धीरज ने बीते दो माह में ही करीब 63 हजार रुपए के सरकारी धन का गबन किया है।
एसएसपी के आदेश पर हुआ गिरफ्तारट्रैफिक सिपाही की करतूत उजागर होने पर एएसपी अभिषेक वर्मा ने एसएसपी कलानिधि नैथानी को जानकारी दी। जिस पर एसएसपी ने सिपाही के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार करने के निर्देश दिए। इस बीच इंस्पेक्टर कैंट रन्जान सचान भी ट्रैफिक लाइन पहुंच गई। धीरज को गिरफ्तार करने के साथ उसके खिलाफ धोखाधड़ी, दस्तावेजों में हेरफेर व सरकारी धन के गबन की धारा में एफआईआर दर्ज की गई।चालान फीस जमा करने के वक्त करता था हेरफेरएएसपी अभिषेक वर्मा ने बताया कि चालान काटे जाने के समय वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस या आरसी जमा की जाती है। कई बार लोग मौके पर चालान शुल्क नहीं देते। जिसके कारण उन्हें ट्रैफिक लाइन स्थित सीओ कार्यालय में फीस जमा करनी होती है। उन्होंने बताया कि कार्यालय में तैनात सिपाही धीरज कुमार चालान फीस जमा करने के दौरान ही हेरफेर करता था। एएसपी के मुताबिक कई बार वाहन चालक कागज लेने की जल्दी में रसीद नहीं लेते थे। जिसके चलते सिपाही को जालसाजी करने में आसानी होती थी। ये है कमाई का गणितसिपाही धीरज कुमार ने गबन करने के लिए पुख्ता योजना तैयार की थी।
एएसपी अभिषेक वर्मा ने ठगी की गणित का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि चालान जमा किए जाने के वक्त तीन कॉपी तैयार की जाती है। एक मूल कॉपी रिकार्ड में रहती है। वहीं, दूसरी कैश कॉपी और तीसरी इम्पाउन्टेड रसीद होती है। उन्होंने बताया कि चालान फीस जमा करने वाले को दी जाने वाली इम्पाउन्टेड रसीद में सिपाही 2000 रुपए भरता था। साथ ही जुर्माने के हिसाब से धाराएं भी लिखता था। पर, कैश कॉपी में वह 2000 की जगह 200 रुपए ही दर्शा कर 1800 रुपए अपने पास रख लेता था। उन्होंने बताया कि चालान फीस जमा करते वक्त कार्बन लगाया जाता है। किसी को शक न हो इसलिए धीरज कॉपी तैयार करते वक्त कार्बन लगाने के बाद भी रकम व धार लिखने की जगह छोड़ देता था। जिसे वह बाद में कार्बन के जरिए ही अपनी इच्छानुसार भरता था। जारी रहेगी जांचएसएसपी कलानिधि नैथानी ने कहा कि सरकारी धन का गबन करने का मामला काफी संगीन है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक पुलिस लाइन में हो रहे घपले में कई और लोग भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है। एसएसपी के मुताबिक धोखाधड़ी के मामले में जो भी लिप्त होगा। उसके खिलाफ खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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