Home क्राइम तेंदुआ मर्डर केस : कैसे करूं विश्वास, बलम मोरा आंधर होइ गए…

तेंदुआ मर्डर केस : कैसे करूं विश्वास, बलम मोरा आंधर होइ गए…

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लखनऊ। तेंदुआ मर्डर केस में वन विभाग सब कुछ जानते हुए भी अंधा हो गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तेंदुए की शरीर से एक भी गोली बरामद नहीं हुई है। वही मीडिया, वीडियो और SSP द्वारा जारी प्रेस नोट ने साफ कर दिया है कि गोली आशियाना इंस्पेक्टर त्रिलोकी सिंह ने चलाई लेकिन सारे सबूत होने बावजूद भी वन विभाग मामले में लीपा-पोती करने में जुटा हुआ है या यूं कहें कैसे करें विश्वास वन विभाग तो आंधर होइ गए…

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आशियाना थाना क्षेत्र के औरंगाबाद में इंस्पेक्टर त्रिलोकी सिंह की गोली का शिकार हुए तेंदुए के शव से गोली ना निकलने के बाद उसकी मौत बेहद रहस्यमय हो गई है। अब सवाल यह है कि अचानक ही तेंदुए के शरीर से गोली कैसे गायब हो गई। जबकि एसएसपी सहित इंस्पेक्टर तक तेंदुए से मुठभेड़ के दौरान गोली मारने की बात स्वीकार की गई है। दरअसल चिडि़याघर में जब तेंदुए का पोस्टमॉर्टम किया गया तो उसके शरीर से एक भी गोली बरामद नहीं हुई जबकि एक के बाद एक कई बार फायरिंग की गई थी।

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घटना के बाद से ही पुलिस और वन विभाग के बीच खींचतान शुरू हो गई थी। तेंदुए की हत्या के बाद स्थानीय लोगों ने इंस्पेक्टर आशियाना त्रिलोकी सिंह के लि‍ए जिंदाबाद के नारे लागए तो शाम तक पुलिस ने इसे अदम्‍य साहस करार दे दिया था। हालांकि जैसे ही वन विभाग ने मुकदमा दर्ज किया तो पुलिस की किरकिरी को छिपाने के लिए एसएसपी दीपक कुमार ने जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा से न्यायिक जांच कराने का अनुरोध कर दिया। अब एक ओर वन विभाग मामले की तह तक पहुंचने के लिए कई बिंदुओं पर गहनता से पड़ताल कर रही है तो वहीं इंस्पेक्टर आशियाना त्रिलोकी सिंह अपना सीयूजी नंबर एसएसआई नयन सिंह को सौंपकर अंडरग्राउंड हो गए। अभी तक पुलिसकर्मियों सहित कई लोगों के बयान दर्ज हो गए हैं अब फायरिंग की गोली तलाशने के लिए मौके पर फिर से जांच अधिकारी दौरा करेंगे। इसके बाद रिपोर्ट मुख्य वन रेंज अधिकारी को सौंपी जाएगी।

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वन अधिकारी प्रवीण कुमार के अनुसार जब फायरिंग नजदीक से होती है तो गोली शव के आर-पार निकल जाती है। इसलिए तेंदुए के शव से गोली बरामदगी नहीं हुई थी। अब जांच अधिकारी मौके पर जाकर गोली की तलाश करेंगे। इसके पहले प्रधान मुख्य वन संरक्षक एसके उपाध्याय ने घटनाक्रम पर अफसोस जताते हुए कहा था कि पुलिस ने यदि धैर्य और शांति दिखाई होती तो तेंदुए को आसानी से पकड़ा जा सकता था।

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उल्लेखनीय है कि थाना क्षेत्र के औरंगाबाद में 15 फरवरी को सुबह तेंदुआ देखे जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद वन विभाग और पुलिस ने तेंदुआ को पकड़ने का काम शुरू किया। इस दौरान कई पिंजरे और जाल बिछाकर मशक्कत तो हुई लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। अगले दिन वन विभाग ने पुलिस को अभियान से हटाते हुए सेना की मदद ली। इसके बाद भी कई राउंड की फायरिंग के बाद भी तेंदुआ हाथ नहीं लगा। इसके बाद पुलिस ने नाटकीय ढ़ंग से तेंदुए को 17 फरवरी को मार गिराया था। तेंदुए के हमले से आठ लोगों को चोट भी आईं थीं। तेंदुए की मौत के बाद वन्य विभाग ने कई अज्ञात लोगों के खिलाफ वन्‍य जीव अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था।

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“नजदीक से फायरिंग होने के कारण गोली आर-पार हो जाती है। इसलिए तेंदुए की मौत के बाद पोस्टमॉर्टम के दौरान गोली बरामद नहीं हुई है। अब जांच अधिकारी मौके पर जाकर गोली की तलाश करेंगे। उनकी रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।”
प्रवीण कुमार
वन अधिकारी लखनऊ रेंज

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“यह सही है कि इंस्पेक्टर आशियाना ने फायरिंग की थी। इसके बाद क्या हुआ क्या नहीं हम कुछ नहीं जानते। बिना मतलब में अब बात बढ़ाने से कोई फाय‍दा नहीं है।”
नयन सिंह
एसएसआई, आशियाना

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