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काकोरी और पीजीआई पोस्मार्टम रिपोर्ट एक सामान : एक में आरोपी गिरफ्तार, दूसरे में आरोपी पुलिसवालों की नहीं हुई गिरफ्तारी

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आम आदमी को जेल, पर पुलिसवालों को जेल क्यों नहीं| काकोरी और पीजीआई में हुई घटना की पोस्मार्टम रिपोर्ट एक सामान| आम आदमी के लिए कानून अलग और पुलिसवालों के लिए अलग |
लखनऊ | राजधानी पुलिस का इकबाल दिन पर दिन खत्म होता जा रहा है। रस्सी को सांप बनाने वाली पुलिस अब खुद ही फसती नजर आ रही है। लखनऊ में तमाम ऐसे मामले हैं जिसमें पुलिस फसी तो वह मामला आज तक फंसा ही रह गया। पुलिस अपना हाथ फंसता देख पुलिस वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज तो कर लेती है लेकिन तमाम ऐसे मामले हैं जो आज तक खुलासे तक नहीं पहुंच पाए| जबकि आम आदमी पर मुकदमा होते हैं तो पुलिस इस कदर टूट पड़ती है कि बिना मामले की जांच पड़ताल किए बिना ही मात्र एक तहरीर पर ही बेगुनाहों को जेल भेज देती है। जबकि कई ऐसे मामले हैं जिसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले, लेकिन तहरीर में मात्र नाम होने के कारण उन्हें जेल की काल कोठरी में धकेल दिया गया।
हम बात कर रहे हैं श्रवण साहू हत्याकांड, काकोरी सुधीर रावत की हत्या, आशियाना किन्नर की हत्या व पीजीआई कामरु की हत्या के मामले की। श्रवण साहू हत्याकांड में एसएसपी मंजिल सैनी ने हत्या के षड्यंत्र में शामिल SI धीरेंद्र शुक्ला, कांस्टेबल अनिल यादव, कांस्टेबल धीरेंद्र यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था लेकिन घटना के लगभग 1 वर्ष से अधिक बीतने के बावजूद भी इन तीनों पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई। काकोरी में बीते दिनों सुधीर रावत पुत्र स्वर्गीय जगतपाल निवासी भलिया काकोरी के हत्या के मामले में तीन आरोपी अब्दुल हबीब, शकील अहमद, सुहेल अहमद को काकोरी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुधीर रावत की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। जिसके कारण मृतक का विसरा सुरक्षित कर लिया गया है। ठीक उसी प्रकार पीजीआई थाना क्षेत्र में कमरू पुत्र शहीद निवासी PGI मवैया डूडा कॉलोनी की हत्या के मामले में आरोपी पुलिस वाले SI आबुतालिब जैदी व अन्य पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार कमरू की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। उसका विसरा सुरक्षित कर लिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि पुलिस वालों के लिए अलग कानून और अन्य आम आदमियों के लिए अलग कानून क्यों? काकोरी में हुए हत्या और PGI में हुई हत्या के दोनों के मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट एक समान है लेकिन एक मामले में लखनऊ पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार कर जेल की काल कोठरी में डाल दिया| जबकि दूसरे मामले में पुलिस यह कहती नजर आ रही है कि जब तक आरोप सिद्ध नहीं होता तब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी। आशियाना पुलिस का कहना है कि किन्नर हत्याकांड मामले में कमरू और उसका भाई सस्पेक्टेड थे। कॉल डिटेल के आधार पर उन्हें उठाया गया था रात भर रखने के बाद उसे छोड़ दिया गया। पर क्या पुलिस वालों ने पूछताछ के नाम पर उसे थर्ड डिग्री नहीं दी होगी| तमाम ऐसे सवाल है जिसका लखनऊ पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है| बस वह सवालों से बचते नजर आ रही है| अब देखना यह है कि आशियाना थाने में तैनात SI व अन्य पुलिस वालों की गिरफ्तारी हो पाती है या नहीं या जब तक यह सिद्ध हो पाएगा तब तक SI व अन्य सिपाही फरार घोषित किए जाएंगे| ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार श्रवण साहू हत्याकांड में आज तक SI धीरेंद्र शुक्ला, कांस्टेबल अनिल यादव व धीरेंद्र यादव फरार चल रहे हैं। IPS अनुराग वत्स का कहना है कि जब तक किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हो सकती जब तक उसका अपराध सिद्ध नहीं होता| पर सवाल यह उठता है कि क्या काकोरी में हुई हत्या के मामले में तीनों व्यक्तियों के खिलाफ अपराध सिद्ध हुआ था? जबकि दोनों मौतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट एक समान हैं।

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