Home प्रदेश बलिया: गणतंत्र की खुशियां ‘वो’ मनाये तो कैसे, जो आ गये फुटपाथ…

बलिया: गणतंत्र की खुशियां ‘वो’ मनाये तो कैसे, जो आ गये फुटपाथ…

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बलिया। आज हर भारतीय नागरिक राष्ट्रीय त्यौहार दिवस अर्थात गणतंत्र दिवस पर भले इतरा रहा हो, खुशियां मना रहा हो, परन्तु यह भी एक विडम्बना ही है कि संविधान स्थापना में देश के हर एक नागरिक तक रोटी, कपड़ा औऱ मकान की जरूरत को सर्वोपरि स्थान मिलने के बावजूद ऐसे भी लोग रहते है, जिनको वर्तमान में एक अदद छत तक नसीब नहीं।

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जी हां! हम बात कर रहे है बलिया जनपद के बैरिया तहसील अंतर्गत रामगढ़ से लेकर दूबेछपरा राष्ट्रीय राज्य मार्ग-31 पर सड़क के किनारे झुग्गी-झोपड़ियों के सहारे जीवन यापन करने वाले कटान पीड़ितों की, जिनका सबकुछ गंगा की तेज धाराओं में विलीन हो चुका है। आलम यह है कि साल दर साल गुजरते गए और शासन-प्रशासन द्वारा इनके पुनर्वास संबंधित आश्वासन हवा-हवाई ही साबित हुआ।

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पुनर्वास और गृह अनुदान के लिए ये आज भी उन आश्वासन के सहारे जी रहे है, जिन्हें प्रशासन द्वारा किसी बच्चे के झुनझुने के माफिक हर एक अनशन पर थमा दिया जाता है।इन कटान पीड़ितों पर हर एक मौसम किसी चुनौती से कम नही होती।

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ठिठुरती सर्दी जहां इन्हें ओस और कोहरे की बूंदों में रात-रात भर जागने को मजबूर करती है, वही गर्मी के तपते मौसम में आग की एक चिंगारी पूरी की पूरी बस्ती तबाह कर देती है। राष्ट्रीय राज्य मार्ग के सड़क के किनारे आसरा लिए इन कटान पीड़ितों के दर्द से ऐसा भी नही की कोई अनजान है,क्योंकि इसी रास्ते से सत्ता पक्ष के प्रतिनिधि सहित प्रशासनिक अमले का कारवां हूटर बजाते हुए आंखे मूंदे ऐसे निकल जाते है, जैसे इन्होंने इन कटान पीड़ितों की हालत देखी ही नहीं। सवाल ये उठता है कि ये कटान पीड़ित राष्ट्रीय त्यौहार ‘गणतंत्र दिवस’ की खुशियां आखिर कैसे मनाये? माना कि तिरंगे के तीन रंग हमे उत्साहित करते है, पर हर एक दिन इन कटान पीड़ितों के चेहरे का दुःख से जो रंगत बदलता है उसका क्या?
‘गणतंत्र की खुशियां वो मनाये तो कैसे, जो आ गये फुटपाथ पर घर की तलाश में’

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