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पुणे से पकड़ा गया बिहार का रहनेवाला गोरखपुर टेरर फंडिंग का मास्टरमाइंड रमेश शाह

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लखनऊ। गोरखपुर टेरर फंडिंग प्रकरण में वांछित चल रहे मास्टर माइंड रमेश शाह को पुणे (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार कर लिया गया है। यूपी एटीएस की कानपुर यूनिट ने महाराष्ट्र एटीएस की मदद से बुधवार को उसे गिरफ्तार किया। शाह को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया जा रहा है। यूपी एटीएस रमेश शाह को लखनऊ की संबंधित कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस कस्टडी रिमांड हासिल करने के लिए अर्जी देगी। कस्टडी रिमांड मिलने के बाद उससे पूछताछ की जाएगी। शाह मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित हजियापुर कैथोलिया का रहने वाला है लेकिन अब वह गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित सर्वोदय नगर में बस गया है। गोरखपुर में असुरन चुंगी के पास उसका सत्यम शॉपिंग मार्ट है, जहां से वह अपना व्यवसाय करता है।
पाकिस्तानी हैंडलर से मिलता था निर्देश
एटीएस ने टेरर फंडिंग मामले में 24 मार्च 2018 को गोरखपुर से छह अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था। ये सभी अभियुक्त पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर आपराधिक षड्यंत्र व कूटरचना करते हुए विभिन्न बैंक खातों में भारत के विभिन्न स्थान से भारी धनराशि मंगवाकर अलग-अलग जगहों पर लोगों में बांटते थे। इस संबंध में एटीएस के लखनऊ थाने में धारा 420, 467, 468, 471, 120बी व 121 ए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। रमेश शाह इस पूरे नेटवर्क का सरगना था।
गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ व अन्य स्रोतों से जानकारी मिलने के बाद इस बात की पुष्टि हुई कि मुख्य रूप से मास्टर माइंड रमेश शाह के द्वारा ही पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर भारत के विभिन्न प्रान्तों से अलग-अलग तिथियों में भारी धनराशि जमा कराई गई। रमेश शाह को ही यह जानकारी होती थी कि विभिन्न बैंक खातों से धन किससे निकलवाकर पाकिस्तानी हैंडलर के पास कैसे भेजना है?
इंटरनेट कॉल से मिलती थी सूचना
रमेश शाह को ही इंटरनेट काल के माध्यम से पता चलता था कि धन आ गया है। इसके बाद रमेश के कहने पर मुकेश नाम का अभियुक्त खाताधारकों को फ़ोन करके पैसा आने की पुष्टि करता था व खाता धारकों को उनका हिस्सा देकर बाकी पैसा निकलवा लेता था जो रमेश के ही बताए हुए लोगों को वितरित किया जाता था। रमेश के ही निर्देशों पर ही मध्य पूर्व के देशों से जम्मू-कश्मीर, केरल व पूर्वोत्तर के कई राज्यों से एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा का धन प्राप्त किया गया और निकाल कर भिन्न-भिन्न स्थानों पर वितरित किया गया।
पुणे में छिपकर रह रहा था रमेश
एटीएस के मुकदमे में वांछित रमेश शाह की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा था। इस संबंध में अन्य सुरक्षा एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा रहा था। इन्ही प्रयासों से एटीएस की कानपुर यूनिट भी महाराष्ट्र के पुणे में खुफिया सूचनाएं जुटा रही थी, जहां से अंतत: सरगना रमेश शाह की गिरफ्तारी हुई। वह इसी मुकदमे में पूर्व में गिरफ्तार अभियुक्त मुकेश कुमार के साथ किराए पर रामजी पाठक के मकान में रह रहा था।
शाह कम्प्यूटर का अच्छा जानकार है और फर्जी प्रपत्रों को तैयार करने का माहिर है। हवाला व्यापारी और विदेशी हैंडलर को कब पैसे जाने होते हैं, यह सिर्फ रमेश ही जानता था। उसे गिरफ्तार करने वाली टीम में एटीएस के डीएसपी मनीष सोनकर के अलावा एसआई ख़ादिम सज्जाद, कांस्टेबल रामजस व संजय सिंह शामिल रहे। एटीएस के आईजी असीम अरुण ने इस टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।

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