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मेरठ में अब सावित्री देवी के दामाद की गोली मारकर हत्या

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मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला में बेखौफ बदमाशों का आतंक चरम पर है, एसएसपी मंजिल सैनी अपराधों पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रही हैं। जिला में गवाहों की हत्या और धमकाने देने के मामला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। यहां अभी हाल ही में दो गवाहों की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा एक महिला गवाह को पुलिस सुरक्षा में गोली मारी गई थी। इन मामलों में पुलिस की लापरवाही देखने को मिली।

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पुलिस धमकी देने वाले व हत्या करने वाले बदमाशों पर नकेल कसने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। उधर फिर बदमाशों बेटे की हत्या की गवाह मां की हत्या के बाद मृतका के दामाद को गोली मारकर हत्या करके सनसनी मचा दी।

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ताजा मामला सरधना थाना क्षेत्र के झटकरी गांव का है। यहां रहने वाले सावित्री देवी के दामाद बबलू की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या करके फिर पुलिस को चुनौती दे डाली। हत्या की इस वारदात से इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का फिर रटारटाया जबाव यही है कि मामले की जांच की जाएगी और जल्द ही बदमाशों पर शिकंजा कसा जायेगा।

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पुलिस का अंदेशा है कि गोली मारकर हत्या कुख्यात सुमित जाट ने ही की होगी। बता दें कि सावित्री देवी बेटे की हत्या के मामले में गवाह थी। सावित्री का भी गवाही ना देने के लिए कत्ल हुआ था। उसके बेटे को भी जान से मारने की धमकी मिली थी। बाइक सवार बदमाशों ने अब सावित्री के दामाद की हत्या करके पुलिस की सक्रियता की पोल खोल दी है।

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गौरतलब है कि अभी हाल ही में 6 फरवरी को मेरठ के कचहरी परिसर में अपने भाई की हत्या के मामले में गवाही देने आए गवाह मितन को जान से मारने की धमकी और मारपीट करने की कोशिश की गई। हालांकि इस दौरान पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव करा दिया। आपको बता दें कि मेरठ के थाना सरूरपुर क्षेत्र के गांव रजपुरा में चेतन नाम के लड़के की 2016 में हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में मृतक की मां सावित्री और भाई मितन गवाह बने थे।

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वहीं परतापुर क्षेत्र के सोरखा गांव में भी गवाह मां बेटे को गोलियो से भूनकर मौत की घाट उतार दिया गया था। जबकि दूसरे सरूरपुर के मामले में महिला गवाह को गनर होने के बाद भी गोली मार दी गई थी। आज इस हत्या की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल कर रख दी है। बता दें कि अभी पिछले दिनों ही डीजीपी ओपी सिंह ने मेरठ में बैठक करके अपराध नियंत्रण के लिए योजना बनाकर निर्देश दिए थे लेकिन इसके बावजूद मेरठ में अपराध चरम सीमा पर है।

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