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पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ला के सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे को हटाने का आदेश

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लखनऊ | हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने किला मोहम्मदी नगर के तीन सरकारी जमीनों पर पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ला के कब्जे को अवैध करार देते हुए, राज्य सरकार को तत्काल उन पर कब्जा करने के आदेश दिए हैं। इन जमीनों पर आयुर्वेदिक अस्पताल, दुकानों व मंदिर आदि बने हुए हैं। इन सभी जमीनों को न्यायालय ने राज्य सरकार में निहित करार दिया है। जमीनों पर कब्जा लेने व वर्तमान के सभी कब्जेदारों को हटाने के लिए न्यायालय ने चार सप्ताह का समय दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति विवेक चौधरी की खंडपीठ ने बृजभान सिंह यादव की ओर से दाखिल वर्ष 2013 व वर्ष 2015 की दो जनहित याचिकाओं पर दिया। याची के अधिवक्ता हरिशंकर जैन की दलील थी कि शारदा प्रताप शुक्ला ने अपने प्रभाव का इस्तमाल करते हुए, जमींदारी उन्मूलन व भूमि सुधार अधिनियम और सम्पत्ति अंतरण अधिनियम के प्रावधानों को ताख पर रख के किला मोहम्मदी नगर के गाटा संख्या- 249, 250 व 251 पर कब्जा किया हुआ है। याची की ओर से कहा गया कि उक्त जमीनें राज्य सरकार में निहित हैं व इनका कानपुर रोड नगर परियोजना- तीन योजना के तहत अधिग्रहण भी किया जा चुका है लेकिन पूर्व मंत्री के प्रभाव में जमीनों पर से अवैध कब्जा सरकारी अधिकारियों द्वारा नहीं हटाया जा रहा है।
न्यायालय ने सारी दलीलें ठुकराईं
शारदा प्रताप शुक्ला की ओर से याचिका का विरोध करते हुए दलील दी गई कि उन्होंने कोई गैर कानूनी कृत्य नहीं किया है, व अधिग्रहण के बावजूद मुआवजा न मिलने के कारण राइट टू फेयर कम्पंसेशन अधिनियम के प्रावधानों के तहत उक्त जमीनों को रिलीज कर दिया जाना चाहिए। न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि शारदा प्रताप शुक्ला ने उक्त जमीनों को अनूसूचित जाति के व्यक्ति से खरीदा जो जमींदारी उन्मूलन व भूमि सुधार कानून के विरुद्ध था लिहाजा उक्त जमीनें अधिनियम के प्रावधानों के तहत राज्य सरकार में निहित हो चुकी थीं। जिन्हें अधिग्रहित करने व किसी को मुआवजा देने की भी आवश्यकता राज्य सरकार को नहीं थी। न्यायालय ने आगे कहा कि जहां पर सरकारी अधिकरण असफल हो जाते हैं, वहां न्यायालय का दायित्व है कि वह दखल दे। लिहाजा इस मामले में तीनों जमीनों पर राज्य सरकार वापिस कब्जा ले व जो भी अन्य कब्जेदार वहां हों, उन्हें हटाया जाए।
सिर्फ एक जमीन की कीमत एक करोड़ से अधिक और भुगतान हुआ मात्र 22 हजार
सुनवाई के दौरान खसरा संख्या 249 की एक सेल डीड भी पेश की गई। इस सेल डीड में जमीन की कीमत एक करोड़ पांच लाख 99 हजार 369 रुपये बताई गई लेकिन जमीन मालिकों को मात्र 22 हजार रुपये का भुगतान वर्षों पहले किया जाना दर्शाया गया। वहीं सुनवाई के दौरान कुछ लोगों ने प्रार्थना पत्र देते हुए, याचिका निरस्त करने की मांग इस आधार पर की कि गाटा संख्या 250 पर शिव मंदिर है जहां लोग पूजा करने जाते हैं।

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