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डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद में सबको साथ लेकर चलने की अद्भुत क्षमता थी : राज्यपाल

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने आज डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद मेमोरियल सोसायटी लखनऊ द्वारा देश के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद की 133वीं जयन्ती पर लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर महिला कल्याण एवं पर्यटन मंत्री डाॅ. रीता बहुगुणा जोशी, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.पी. सिंह, किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एम.एल.बी. भट्ट, पूर्व मुख्य सचिव श्री आलोक रंजन, डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद मेमोरियल सोसायटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री नरेश चन्द्रा सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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राज्यपाल ने कहा कि डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद में सबको साथ लेकर चलने की अद्भुत क्षमता थी। संसद में संविधान निर्माण में हुई चर्चा की लिखित प्रति उपलब्ध है, जिससे पता चलता है कि डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद ने पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर ‘जन-गण-मन’ को राष्ट्रगान तथा वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया। आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम् की भूमिका के चलते इसे राष्ट्रगीत का दर्जा देते हुए डाॅ. राजेन्द्र बाबू ने कहा था कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को वही मान-सम्मान मिलेगा जो राष्ट्रगान को मिलेगा।

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श्री नाईक ने कहा कि प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान सभा के अध्यक्ष के नाते सबको साथ लेकर चलने और आपसी सहमति बनाने का महत्वपूर्ण काम किया। संविधान निर्माण में एक राय बनाना महत्व का काम है। भारतीय संविधान का प्रारूप तैयार करने का कार्य बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर ने किया तो राजेन्द्र बाबू ने सबको एकमत करने का काम किया। संविधान सभा के अध्यक्ष के नाते उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए। स्व. डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद ने देश में जनतंत्र की नींव डालने का काम किया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार काम करना राजेन्द्र बाबू की प्रति सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।

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राज्यपाल ने कहा कि राजेन्द्र बाबू का व्यक्तित्व अत्यन्त सरल था। उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व किसी को भी प्रेरणा देने के लिए परिपूर्ण है। देश की स्वतंत्रता के पूर्व एवं आजादी के बाद डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद ने जिस प्रकार से काम किया वह अद्भुत है। वे कार्य के प्रति समर्पित थे। स्वदेशी आंदोलन को कार्यान्वित करने की प्रेरणा को वहन करने वाले डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद का नाम अग्रणी है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी आंदोलन में राजेन्द्र बाबू ने शीर्ष नेतृत्व दिया।

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मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद ने केवल राष्ट्र का मान ही नहीं बढ़ाया बल्कि देश के मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाई है। वे एक मेधावी छात्र, कुशल अधिवक्ता के साथ-साथ देश के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाने वाले नेता थे। उन्होंने कहा कि युवा उनसे प्रेरणा प्राप्त करें। नरेश चन्द्रा अध्यक्ष डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद मेमोरियल सोसायटी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया तथा सोसायटी का संक्षिप्त परिचय दिया।

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