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नियम-कानून को ठेंगा दिखा कर किया ट्रान्सफर, अब जवाब देने में कतरा रहें अधिकारी

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लखनऊ। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत एक ऐसा प्रकरण सामने आया है जिससे आला अधिकारियों की पोल खुलती नजर आ रही है और अधिकारी खुद को बचाते फिर रहे हैं। मामला स्वास्थ्य विभाग में अधिकारी रिश्वतखोरी और नियम-कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं। साथ ही साथ अधिकारी सरकार की छवि भी दांव पर लगाकर खुद के मनमानी रवैये उजागर हुई है| इस मनमानी में पैसे लेकर एक लापरवाह आरोपी कर्मचारी की तैनाती प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उस पद पर कर दी गयी है जिसके लिये अभी तक विज्ञापन ही नहीं निकला है| निर्धारित पालिसी के तहत ट्रान्सफर कर कमाई करना तो यहाँ आम बात है लेकिन इस मामले में तो एक कदम आगे बढ़कर बिना पद के ट्रान्सफर करने की बात सामने आयी है|
शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
जानकारी मुताबिक सीतापुर जिला अस्पताल में साइक्रियाटिक सोशल वर्कर के पद पर तैनात रवि 35,000 रुपये प्रतिमाह पर मनो-चिकित्सक डॉ. प्रांशु अग्रवाल के अधीन कार्य कर रहा था| मुख्य चिकित्साधिकारी ने जैसे ही एक्शन भी लिया उसने मंत्रियों के चक्कर लगाने शुरू कर दिए और मंत्री ने जिला लेवल के अधिकारियों से कहा कि इसे कुछ दिन का और समय दो| जब जिले में उसकी दाल नहीं गली तो उसने राष्ट्रीय स्वास्थय मिशन के लखनऊ में बैठे अधिकारियों के चक्कर काटने शुरू कर दिया और उनकी जेब गर्म करने में लग गया| आखिरकार अधिकारी उसके जंगल में फास गए है पैसे लेकर उसका स्थानान्तरण सीतापुर से लखनऊ कर दिया|
विज्ञापन निकला और कैंसिल हो गया, सवाल पोस्टिंग कैसे हो गयी?
लखनऊ में पिछले दिनों साइक्रियाटिक सोशल वर्कर के पद के लिए के लिए विज्ञापन निकाला गया था लेकिन बाद में कैंसिल कर दिया गया था| अब सवाल बनता है कि इस पद पर विज्ञापन निकालने की तैयारी की जा रही है तो पोस्टिंग किसके जुगाड़ और संरक्षण से हो गयी? इसी बीच नेशनल हेल्थ मिशन के स्टेट प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट लखनऊ ऑफिस से जनरल मेनेजर एचआर की ओर से मिशन निदेशक के अनुमोदन का हवाला देते हुए रवि प्रसाद का ट्रान्सफर सीतापुर से लखनऊ करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं| इसी आधार पर सीतापुर में भी मुख्य चिकित्साधिकारी ने आदेश जारी कर दिए| अब इसमें किसका हाथ है ये तो जाँच के बाद पता चलेगा पर विभाग के अधिकारी अपनी कुर्सी बचाने की जुगाड़ में लग गए हैं और जाँच से पीछा छुड़ाते भाग रहे हैं|
हाल ही में एक अधिकारी पर गिरी थी गाज
आपको बता दे कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है इसके तहत एक ट्रान्सफर पालिसी बनी हुई है| अभी इस पालिसी को विभाग में भी पूरी तरह से उजागर नहीं किया गया है| घूस लेने की शिकायत मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बतायी थी और एनआरएचएम के समय से ही विवादों में रहे इस एनएचएम में ट्रान्सफर-पोस्टिंग में कमाई करने वाले एक आला अधिकारी को पिछले दिनों यहाँ से हटाया गया था|
डीजी हेल्थ पदमाकर सिंह बने मामले से अनजान
जब इस प्रकरण में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पदमाकर सिंह से बात हुई तो उन्होंने पूछा कौन मामला पूछ रहे हैं, मुझे कोई जानकारी नहीं है अगर ऐसा कुछ हुआ है तो एनएचएम से हुआ होगा| अब सवाल डीजी हेल्थ पर यह उठता है कि, इस ट्रांसफर प्रकरण की एक कॉपी उनके पास भी भेजी गयी है और वहां है भी तो डीजी हेल्थ खुद को मामले अनजान क्यों बनते नजर आ रहे हैं| ट्रान्सफर प्रकरण को लेकर सीतापुर से लेकर लखनऊ तक विभाग में बहुत चर्चा चल रही है साथ ही बताया जाता है कि लोग कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं|

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