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पारा क्षेत्र में गैर मान्यता वाले विद्यालयों कि भरमार, मामला पहुंचा जिलाधिकारी का पास

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लखनऊ। राजधानी के पारा इलाके में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस के विरोध में अब लगातार अभिभावकों की आवाज उठाने लगी है। इलाके में हर 10 कदम पर प्राइवेट स्कूल खुले हुए हैं। हर विद्यालय के बोर्ड पर कक्षा 10 की मान्यता और प्राइवेट फॉर्म भरवाने की सुविधा, बेहतर शिक्षा व हिंदी-इंग्लिश मीडियम होने की बात दर्शाई गई है।

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लेकिन हम आपको बता दें कि यहां सैकड़ों की भीड़ में खुले विद्यालय लगभग 95% फर्जी व गैर मान्यता के चल रहे हैं। इनके संचालकों ने मात्र NGO के माध्यम से अपने स्कूल को रजिस्टर्ड करा रखा है और आसपास के जिलों से संपर्क कर हाईस्कूल व इंटर के बच्चों को पास कराने की जिम्मेदारी पर फार्म भरवाते हैं। खास बात यह भी है कि कई स्कूलों की पांचवी तक की भी मान्यता नहीं है लेकिन वह भी हाई स्कूल तक के बच्चों को पठन पाठन का कार्य कराते हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट अभिषेक कुमार सिंह की माने तो उन्होंने इस संबंध में दर्जनों स्कूलों के खिलाफ आरटीआई दाखिल कर उनकी मान्यता का विवरण मांगा है साथ ही बेसिक शिक्षा अधिकारी से अवैध रूप से चल रहे विद्यालयों के खिलाफ कारवाई करने का आग्रह किया है।

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पारा निवासी पंकज तिवारी ने एक निजी स्कूल आर्यन एकेडमी, जय माँ अम्बे, जिज्ञासा पब्लिक स्कूल, इंडियन पब्लिक स्कूल, अलका पब्लिक स्कूल, मॉडल पब्लिक स्कूल सहित दर्जनों स्कूलों के खिलाफ के खिलाफ जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर ते हुए अवगत कराया है कि विद्यालय द्वारा बच्चों की शिक्षा के नाम पर अवैध ढंग से फीस वसूली जा रही है। गरीब और असहाय बच्चों को को शिक्षा देने के नाम पर विद्यालय आनाकानी कर रहा है। जबकि विद्यालय की मान्यता लेते समय सभी विद्यालय के प्रबंधक व मैनेजर एक एफिडेविट के माध्यम से बीएसए को संतुष्ट करते हैं कि हम गरीब और असहाय बच्चों को बेहतर शिक्षा उचित मूल्य पर उपलब्ध कराएंगे, लेकिन यह वादे मात्र कागजों में ही सीमित रह जाते हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए पंकज तिवारी को आश्वस्त किया है कि जल्द से जल्द इन विद्यालयों के खिलाफ उचित कार्रवाई करते हुए इनकी मान्यता व मनमानी फीस पर रोक लगाई जाएगी।

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