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8 गधों ने किये जेल परिसर में लगे पेड़ नष्ट, जेलर ले खिलायी 4 दिन जेल की हवा

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उरई, कानपुर| गलत काम करने वाले अपराधियों को जेल जाते आपने देखा होगा लेकिन उरई में अजब मामला हुआ।।ऐसा अद्भुत और अनोखा मामला सोमवार को यहां जिला कारावास में देखने को मिला। जेल कॉलोनी की बगिया नष्ट करने वाले आठ गधों को जेल स्टॉफ ने जेल में बंद कर दिया था। चार दिन बाद सोमवार दोपहर को बीजेपी नेता व गधा मालिकों की मिन्नतों के बाद गधों को जेल से रिहा किया गया।

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गधों के जेल से बाहर आने पर उनके मालिकों की खुशी का ठिकाना रहा। जेल स्टाफ के मुताबिक अन्ना घूमने वाले इन गधों से करीब दो लाख का नुकसान हुआ और स्टाफ के कई बच्चे भी जख्मी हुए। इनके मालिको को सबक सिखाने के लिए गधों को जेल में बंद करना पड़ा।

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सोमवार सुबह काफी दिनों से बंद पड़ी उरई की बच्चा जेल का नजारा देखने लायक था। बच्चा जेल से चार दिनों से बंद 8 गधे रिहा हो रहे थे। जेल से बाहर आ रहे गधों को देखकर उनके मालिकों की खुशी की ठिकाना न था। मामले की जानकारी करने पर पता चला कि इन 8 गधों को जेल की हवा इसलिए खाली पड़ी कि इन्होंने जेल के बाहर की बगिया व जेल स्टाफ कालौनी की बगिया को कई दफा नष्ट किया था।

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इतना ही नहीं इनके हुड़दंग से जेल स्टाफ के कई बच्चे भी जख्मी हुए थे। अन्ना घूमने वाले इन गधों के मालिकों को जेल स्टाफ ने कई दफा बुलाकर समझाया लेकिन वे गधों को खुला छोड़ते रहे। गधा मालिकों को सबक सिखाने के लिए जेल स्टॉफ ने चार दिन पहले 8 गधों को पकड़ा और बच्चा जेल में ले जाकर बंद कर दिया गया।

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तीन दिन से लापता गधों की खोजबीन कर रहे मालिकों जितेंंद्र, महेश, हरीनारायण और हिम्मत को रविवार रात को पता चला कि उनके गधे जेल में बंद है जिस पर वह लोग एक भाजपा नेता के साथ जेल पहुंचे। स्टाफ ने सोमवार सुबह लिखा पढ़ी कर गधों को रिहा करने की बात कहकर भाजपा नेता व मालिको को चलता कर दिया। सोमवार सुबह फिर भाजपा नेता गधा मालिकों के साथ जेल पहुंचे। करीब तीन घंटे की मशक्त के बाद भाजपा नेता की पैरवी पर गधों को जेल से निकालकर उनके मालिकों के हवाले किया गया।

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क्या कहते हैं जिम्मेदार
जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने बताया कि उन्होंने कई दफा गधा मालिकों बुलाकर समझाया पर वह मानें नहीं। जेल परिसर के बाहर कई दफा पेड़ पौधे लगाए और कई दफा जेल स्टाफ की कालौनी में पेड़ पौधे लगाए जिनको अन्ना घूम रहे इन गधों ने नष्ट किया। इतना ही नहीं कालौनी में खेल रहे स्टाफ के कई बच्चे भी इन गधों की चपेट में आकर जख्मी हुए। मालिकों को सबक सिखाने के लिए मजबूरी में उनको गधों को बंद करना पड़ा।

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गधों के खाने पीने का रहा पूरा इंतजाम
बच्चा जेल में बंद किए गए सभी गधों का जेल स्टाफ ने पूरा ख्याल रखा। उनके भूसे व पानी का पूरा इंतजाम किया गया। इतना ही नहीं दिन भर वह जेल परिसर में खुले घूमे और वहां लगी घास चरी। बच्चा जेल काफी समय से बंद है और यहां के नाबालिग बंदियों को सुरक्षा के मद्देनजर जेल में ही रखा गया है।

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भाजपा नेता का बना मजाक
गधों को जेल से रिहा कराने के लिए भाजपा नेता को काफी मशक्कत करनी पड़ी। गधों की पैरवी करने की वजह से जेल के अंदर उनका काफी मजाक भी उड़ाया गया। जेल के बाहर पत्रकारों के आने की खबर पाकर नेता जी जेल से निकालने में हिचकिचाए। काफई देर बाद बाहर निकले नेताजी ने कहा कि जेल में बंद एक दोस्त मिलने आए थे।

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