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झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा को CBI कोर्ट ने माना दोषी, कल होगा सजा का ऐलान

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रांची| दिल्ली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने कोयला घोटाले के एक मामले में झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा को दोषी करार दिया है। वहीं इस मामले में झारखंड के पूर्व सचिव एचसी गुप्ता, झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार और एक अन्य को आपराधिक षड्यंत्र रचने और धारा 120 B के उल्लंघन का दोषी माना है। कोर्ट कल (14 दिसंबर) सजा सुनाएगी।

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सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश भरत पराशर ने आज बुधवार को सभी आरोपियों को फैसला सुनाते वक्‍त अदालत में मौजूद रहने का आदेश दिया था। यह मामला झारखंड में राजहरा नॉर्थ कोयला ब्लॉक को कोलकाता की विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड (वीआईएसयूएल) को आवंटित करने में कथित अनियमिताओं से संबंधित है। वीआईएसयूएल के निदेशक वैभव तुलस्यान तथा दो लोक सेवकों बसंत कुमार भटटाचार्य और बिपिन बिहारी सिंह तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन कुमार तुलस्यान को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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अदालत ने आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक षडयंत्र) के साथ धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासात) तथा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत कथित अपराधों का संज्ञान लिया था। इसके बाद इन सभी लोगों को बतौर आरोपी समन भेजा गया। सीबीआई ने आरोप लगाया कि कंपनी ने आठ जनवरी 2007 को राजहरा नॉर्थ कोयला ब्लॉक के आवंटन के लिए आवेदन दिया था। उसने कहा कि झारखंड सरकार और इस्पात मंत्रालय ने वीआईयूएसएल को कोयला ब्लॉक का आवंटन करने की सिफारिश नहीं की थी इसके बावजूद 36वीं स्क्रीनिंग कमेटी ने आरोपी कंपनी को ब्लॉक का आवंटन करने की सिफारिश की।

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सीबीआई ने कहा कि स्क्रीनिंग कमेटी के तत्कालीन चेयरमैन गुप्ता ने यह तथ्य तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से छिपाया कि झारखंड सरकार ने वीआईएसयूएल को कोयला ब्लॉक का आवंटन करने की सिफारिश नहीं की है। उस समय कोयला मंत्रालय का प्रभार मनमोहन सिंह के पास ही था। सीबीआई ने आरोप लगाया कि कोड़ा, बासु और दो आरोपी लोक सेवकों ने वीआईएसयूएल को कोयला ब्लॉक का आवंटन करने के लिए साजिश रची। आरोपियों ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार कर दिया है।

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आपको बता दें कि पहले भी यूपीए सरकार के समय मध्यप्रदेश के थेसगोड़ा-बी रूद्रपुरी कोयला ब्लॉक के आवंटन घोटाले में एचसी गुप्ता को दो साल की सजा हो चुकी है। यह 31 दिसंबर 2005 से नवंबर 2008 तक कोयला सचिव थे। इन्होंने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह के समक्ष कमल स्पॉंज स्टील एंड पावर लिमिटेड (केएसएसपीएल) कंपनी को मध्य प्रदेश में कोयला ब्लॉक आवंटित करने की सिफारिश की थी, जो उस समय आवंटन के नियमों को पूरा नहीं करती थी। सीबीआई ने विशेष अदालत से गुप्ता को धोखाधड़ी और आपराधिक षडयंत्र के जुर्म में अधिकतम सात साल जेल की मांग की थी। गुप्ता के खिलाफ कोयला घोटाले से जुडे 10 और मामले लंबित हैं, जिन पर अलग से कार्रवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों पर संयुक्त सुनवाई की गुप्ता की याचिका को पिछले वर्ष खारिज कर दिया था।

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