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बसपा सुप्रीमो मायावती की मुश्किलें बढ़ीं, भर्ती घोटाले में सीबीआई ने प्रारंभिक जांच की दर्ज

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मारक घोटाला के बाद सीबीआई के रडार पर अब बसपा शासनकाल में हुई अपर निजी सचिव के 250 पदों पर हुई भर्तियों का मामला भी है। इस बड़े मामले में भी सीबीआइ का शिकंजा कस गया है। सीबीआइ दिल्ली ने कल इस मामले की प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज कर ली है।
समाजवादी पार्टी के शासनकाल में यूपीपीएससी (उप्र लोक सेवा आयोग) की भर्तियों की जांच कर रही सीबीआइ को बसपा शासनकाल में शुरू हुई अपर निजी सचिव के पदों पर भर्ती में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। इस पर सीबीआइ ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर बसपा शासनकाल के दौरान हुई भर्तियों की जांच की अधिसूचना जारी करने की सिफारिश की थी, जिस पर सितंबर, 2018 में राज्य सरकार ने इन भर्तियों की सीबीआइ जांच की संस्तुति की थी। आरोप है कि भर्ती के इस मामले में सचिवालय के कई अधिकारियों ने अर्हता को दरकिनार कर अपने रिश्तेदार व करीबियों की भर्ती करा दी थी।
इस मामले में अधिकारियों ने शिकायतों का हवाला देते हुए दावा किया कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा में लाभ पहुंचाया गया जो मूल न्यूनतम योग्यता भी पूरी नहीं करते थे। इस प्रकरण में शिकायत में आरोप है कि 2007-12 में मायावती के मुख्यमंत्री रहते उत्तर प्रदेश सरकार में सेवारत कुछ नौकरशाहों के ‘निकट संबंधियोंÓ को पदों के लिए चुना गया। आरोप है कि यूपीपीएससी के अधिकारियों ने परीक्षकों से मिलीभगत कर अंकों में बदलाव किए ताकि उन्हें चुना जा सके। राज्य सरकार की शिकायत में यह गंभीर आरोप हैं, जिसको देखते हुए प्रारंभिक रिपोर्ट दर्ज की गई है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 में मायावती सरकार में अपर निजी सचिव की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी, जबकि अखिलेश सरकार में तीन चरणों में इसकी परीक्षा कराई गई थी और परिणाम घोषित हुआ था। भाजपा सरकार ने सपा शासनकाल में एक अप्रैल, 2012 से 31 मार्च, 2017 के मध्य हुई भर्ती में धांधली की जांच सीबीआइ को सौंपी थी। सीबीआइ ने केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान सीबीआइ को शिकायत मिली थी कि बसपा सरकार में शुरू हुई अपर निजी सचिव की भर्ती प्रक्रिया में भी बड़े पैमानेे पर धांधली की गई थी। इस पर सीबीआइ ने बसपा शासनकाल में हुई भर्तियों की भी जांच करने की अनुमति मांगी थी।
बढ़ेंगी कई बड़ों की मुश्किलें
सचिवालय में तैनात कई निजी सचिवों ने अपने रिश्तेदारों व करीबियों की भर्ती कराई थी। अपर निजी सचिव के 250 पदों पर हुई भर्ती में 237 अभ्यर्थियों को आनन-फानन ज्वाइन करा दिया गया था। इस मामले में मुख्यमंत्री सचिवालय में तैनात रहे कुछ अधिकारियों की भूमिका भी इस मामले में संदेह के घेरे में है। ऐसे में सीबीआइ जांच के दौरान कई बड़ों पर शिकंजा कस सकता है।

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