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सिटीयाबाजी में हुई थी बजरंग दल नेता की हत्या, महिला समेत चार गिरफ्तार

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कानपुर| अर्मापुर में बजरंग दल के नेता विजय यादव की हत्या का पुलिस ने रविवार को खुलासा कर दिया। इस मामले में महिला समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। कत्ल में प्रयुक्त हथियार भी बरामद हो गया है। वारदात में शामिल दो लोग अभी भी फरार हैं। पुलिस के मुताबिक महिला पर संबंध बनाने के दबाव के चलते विजय की हत्या की गई।
विजय को मारने की पूरी योजना बनाने के बाद घटना को अंजाम दिया गया। हत्यारोपियों को सर्विलांस सिस्टम के बारे में जानकारी थी। इस कारण जितने लोग इसमें शामिल रहे, उनमें से किसी ने भी मोबाइल का प्रयोग नहीं किया। वारदात के दौरान सभी के मोबाइल उनके घर पर मौजूद थे और गाजियाबाद से आया अनुपम और उसका साथी अपना मोबाइल गाजियाबाद छोड़कर आए थे ताकि सर्विलांस पर लेने के बाद पुलिस को मोबाइल दूसरी लोकेशन पर मिले। घटना में शामिल अनुपम झा और उसके एक साथी को तलाशने के लिए पुलिस की टीम गाजियाबाद रवाना हो गई है।

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पुलिस के मुताबिक विजय की नजर आरोपी विनय झा की पत्नी पूनम झा पर थी। चार साल पहले पूनम ने अपने घर में विजय से फर्नीचर का काम कराया था। उसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी। इसके बाद विजय पूनम के पीछे पड़ गया था और दोनों में बातचीत शुरू हो गई थी। झा परिवार को पता चलने के बाद दोनों गुटों में कई बार झगड़ा हुआ पर इन दोनों में बातचीत बंद नहीं हुई। पिछले साल झा परिवार ने विजय के खिलाफ कल्याणपुर में 307 का मुकदमा लिखवाकर उसे जेल भिजवाया था। उसमें एक महिला कर्मचारी को परेशान करने का भी जिक्र था। पुलिस की अभी तक की पूछताछ में सामने आया कि वह महिला कर्मचारी और कोई नहीं, बल्कि पूनम झा ही थी मगर पूनम का नाम कभी भी विवेचना में सामने नहीं आया। दीपावली से दस दिन पहले ही विजय जेल से छूटकर आया था।

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जेल से बाहर आने के बाद विजय ने पूनम से सम्पर्क करने की कोशिश की मगर इस बार उसके परिजन भी पहले से तैयार थे। काफी मशक्कत के बाद भी विजय पूनम तक नहीं पहुंच पाया। इस दौरान विजय ने एक अन्य लड़की को सेल्सगर्ल बनाकर विनय के घर भेजा और उसके जरिए पूनम को अपने नाम से लिए गए सिमकार्ड और फोन भिजवा दिया। पूनम के पास फोन पहुंचने के साथ ही विजय एक बार फिर उसके सम्पर्क में आ गया। पुलिस पूछताछ में पूनम ने कहा कि विजय उसके ऊपर संबंधों को लेकर दबाव बना रहा था।

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पूनम के मुताबिक विजय ने फेसबुक पर रिचा झा और राधे झा के नाम से फर्जी आईडी बनाने के साथ ही पूनम और अपनी तस्वीरें पोस्ट करनी शुरू कर दी थीं। इसकी जानकारी उसने पूनम और उसके परिजनों में कई रिश्तेदारों को दे दी थी।
पूनम के मुताबिक विजय उससे कहता था कि वह स्मैक, चरस व असलहे उसे देगा वह अपने पति की गाड़ी में रख दे। इससे वह पूरे परिवार को फंसाकर जेल भिजवा देगा और फिर वह दोनों आराम से रहेंगे। पूनम के मुताबिक उसने अपने परिजनों को इस बारे में जानकारी दे दी थी। जब मामला हद पार कर गया तब इन लोगों ने विजय को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

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24 नवम्बर को पूनम ने विजय को फोन करके अर्मापुर थाने के पीछे बुलाया। उससे स्मैक, चरस, असलहा और अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं लाने को कहा। पूनम ने उसे यकीन दिलाया कि वह सारी चीजें अपने पति की कार में रखवा देगी। विजय शाम को अर्मापुर थाने के पीछे पहुंचा तो वहां पर पूनम, पति विनय झा, जेठ विनोद झा, भतीजे सत्यम उर्फ विक्की, रिश्तेदार अनुपम झा और एक अन्य युवक के साथ मौजूद थी। पूनम के मुताबिक वहां सबने पहले विजय के समझाने का प्रयास किया उसके न मानने पर रिंच से पीछे से उसके सिर पर वार कर दिया। वह अचेत हुआ उसके बाद पूनम ने बाकी लोगों के साथ मिलकर चापड़ से विजय पर कई वार किए और फिर सभी भाग निकले।

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एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा के मुताबिक हत्या में इस्तेमाल चापड़ बरामद हो गया है। पूनम ने घटना के समय जो साड़ी पहन रखी थी, उसे भी बरामद कर लिया गया है। विजय का आखिरी वीडियो सबसे बड़ा सबूत है। इतने साक्ष्य दोष सिद्ध करने के लिए काफी हैं। जो फरार है उन्हें भी जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। पुलिस को कॉल डीटेल में यह पता चला कि पूनम और विजय के बीच चार चार घंटे बात होती रही है। अगर पूनम उससे इतना ही त्रस्त थी तो इतनी देर बात आखिर किस बात पर होती थी। पूनम ने खुद को विजय द्वारा ब्लैकमेल किए जाने का बयान दिया है मगर ब्लैकमेल वह कर किस बात पर रहा था। कल्याणपुर से जब झा परिवार ने विजय को जेल भिजवाया था तब पूनम का नाम पूरी विवेचना में क्यों नहीं खोला गया। पूनम को जब इतनी दिक्कत थी तब सन 2016 में उसने सामने आकर पुलिस से शिकायत क्यों नहीं की।

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