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अवध विश्वविद्यालय के कुलपति की हिटलरी तानाशाही के चलते एलएलबी के छात्राओं का भविष्य खतरे में

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लखनऊ । बाराबंकी जनपद में एलएलबी के छात्राओं की परीक्षा 4 जनवरी को जवाहरलाल नेहरू डिग्री कॉलेज बाराबंकी थी। जहां 7 विद्यालयों का सेंटर सहित बीबीए के छात्राओं की परीक्षा दिलाई जाने वाली थी। छात्रों की संख्या अधिक देखते हुए अवध विश्वविद्यालय के कुलपति ने इसकी पूरी जिम्मेदारी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आईएएस अजय कुमार द्विवेदी को दे दी। परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों के लिए जनवरी माह के ठंड में टेंट लगाकर दावत में लगने वाली मेज व कुर्सियां लगाकर परीक्षा दिलाने की व्यवस्था की गई।

एक भी मेज पर ना ही कोई अनुक्रमांक पड़ा और ना ही सीटिंग प्लान की कोई व्यवस्था की गई। परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे की थी। अव्यवस्थाओं को देखते हुए छात्र उग्र होने लगे। कई मेजों पर शादी ब्याह में खाने वालों का जूठन लगा हुआ था। कुर्सियों और मेजों पर बैठ कर लिखने में छात्राओं को दिक्कतें होने लगे, वही खुले आसमान के नीचे बैठे कुछ छात्र ठंड में ठिठुर ने लगे। कुछ छात्र तो अपना कमरा भी नहीं जान पा रहे थे कि उन्हें पेपर कहां किस कमरे में देना है। वहीं कॉलेज प्रशासन के प्रोफेसर ने अपने बयान में बता दिया कि बच्चे नकल करना चाहते थे जो उन्हें सुविधा नहीं मिली जिसके कारण बच्चों ने बवाल किया। लेकिन कोई यह तो बताए जनवरी माह की ठंड में परीक्षा देने आए छात्रों को खुले आसमान के नीचे टेंट में लगने वाले मेज कुर्सियों पर परीक्षा दिलाने का कहां का न्याय है। वहीं कुछ छात्राओं का आरोप था कि उन्हें बेंचों पर पांच-पांच की संख्या में बैठाया गया था। कॉपियां और पेपर बांटते बांटते शिक्षकों ने 2:30 बजा दिए। अपने समय का दुरुपयोग होते हुए देख छात्र उग्र होने लगे उन्होंने इस व्यवस्था पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। छात्रों के सवालों से झुलाए शिक्षकों ने बच्चों को लाठियों के दम पर धमकाने का प्रयास किया। इतनी अव्यवस्थाओं के बीच छात्र अपना पेपर दे ही रहे थे कि अवध यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक उमानाथ सिंह के द्वारा बताया गया की अवध विश्वविद्यालय के कुलपति ने आज होने वाली परीक्षा अगली सूचना मिलने तक निरस्त कर दी गयी है। जिस पर छात्रों ने  विरोध प्रदर्शन शुरू किया, तो बाहर खड़ी पीएसी के द्वारा लाठी चार्ज कर दिया। जवाहर पीजी कॉलेज में सात LLB कॉलेज के परीक्षा केंद्र बनाये गये थे। जवाहर पी. जी. कॉलेज के प्राचार्य आरएस यादव ने पहले ही LLB कॉलेजों की परीक्षा कराने से इंकार कर दिया था, लेकिन कुलपति की तानाशाही की वजह से तेजतर्रार होनहार कहे जाने वाले जॉइंट मजिस्ट्रेट आईएएस अजय कुमार द्विवेदी ने परीक्षा कराने की सम्पूर्ण जिम्मेदारी खुद ले लिया और कहा मैं व्यवस्थित और शांति पूर्ण ढंग से संपन्न करा दूंगा। पूरी तरीके से इस अव्यवस्था के जिम्मेदार एसडीएम सदर आईएएस अजय द्विवेदी है। छात्रों का कहना है क़ि पूरी तरह से उनका प्रशासन विफल साबित हुआ। कालेज में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं की गई थी। कई छात्राएं बेहोश होकर गिर पड़ी।

बाराबंकी जिला प्रशासन छात्रों की समस्याएं सुनने के बजाय उनपर पीएसी द्वारा लाठियां चलवादी। कार्यवाहक जवाहर डिग्री कॉलेज के प्राचार्य अम्ब्रीश शास्त्री ने उल्टा बच्चों पर आरोप लगाते हुए कहा कि एलएलबी के छात्र नकल करना चाहते थे जिसको लेकर उन्होंने कॉलेज के अंदर तोड़फोड़ की, जो सरासर गलत है। जो छात्र पढ़ाई के माध्यम से अपना कैरियर तलाश रहे हैं और लाखों रुपए अपनी फीस पर खर्चा कर रहे हैं तो क्या जिला प्रशासन को इतना भी नहीं बनता कि उनके लिए उचित व्यवस्था उचित कमरे व संयोजित तरीके से परीक्षा दिलाई जाए। सभी छात्र मानते हैं कि जो हुआ वह दुखद हुआ। इस प्रदर्शन के दौरान साईं कॉलेज की एक छात्रा की जान भी चली गई लेकिन उन बच्चों का क्या जिन की परीक्षाएं निरस्त हो गई।

कुलपति की इस हिटलर शाही के चलते सरकार का करोड़ों रुपए व बच्चों का भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। वहीं कॉलेज प्रशासन द्वारा बच्चों पर नकल का आरोप लगाकर उनका मनोबल पूरी तरह से तोड़ा जा रहा है। इस संबंध में कई छात्रों ने लिखित शिकायत देकर राज्यपाल व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश से न्याय की गुहार लगाई है।

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