Home खबरें हटके ’बस्तर की शार्क’ लुप्त होने के कगार पर!

’बस्तर की शार्क’ लुप्त होने के कगार पर!

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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ की इंद्रावती नदी में पाई जाने वाली संकटग्रस्त बोध नामक मछली का बड़े पैमाने पर शिकार हो रहा है। इस मछली को बचाने की मांग 15 साल से जारी है, लेकिन ’बस्तर की शार्क’ के नाम से लोकप्रिय बोध मछली को बचाने का प्रयास शासन स्तर पर नहीं हो रहा है।

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इसलिए बोध मछली को राज्य मछली का दर्जा देकर इसके संरक्षण व संवर्धन की मांग की जा रही है।
मछुआरा संघ के अध्यक्ष एम. आर. निषाद ने बताया कि छत्तीसगढ़ के दक्षिण में बहने वाली इंद्रावती नदी में चित्रकूट जल प्रपात से लेकर गोदावरी नदी के संगम तक बोध मछली पाई जाती है। नदी किनारे रहने वाले कुडुक जाति के लोग इसे देव मछली मानते हैं। चित्रकूट जल प्रपात के पास एक खोह में इस मछली की मूर्ति भी स्थापित है, जिसकी ग्रामीण पूजा करते हैं।

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उन्होंने बताया कि इस मछली के नाम पर इंद्रावती किनारे बारसूर के पास एक बस्ती का नाम भी बोध है। जहां पर बोधघाट परियोजना प्रारंभ हुई थी। जगदलपुर की सिंचाई विभाग की कॉलोनी और पास ही स्थित थाना का नाम भी बोधघाट है, लेकिन बोध मछली क्या है? और इसकी महत्ता क्या है? इस दिशा में कभी गंभीरता से काम नहीं किया गया।

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बस्तर में जिस मछली को बोध कहा जाता है, उसे अंग्रेजी में कैटफिश कहा जाता है। प्राणी विज्ञान में इसे बोमारियस बोमारियम कहते हैं। यह मछली 150 किलोग्राम तक वजनी होती है। इसे लोहे के तारों की जाली बनाकर ग्रामीण पकड़ते हैं क्योंकि यह सामान्य जाल को फाड़ देती है।
गर्मी के दिनों में इंद्रावती नदी का जलस्तर नीचे आते ही बड़े पैमाने पर इस मछली को पकड़ने का काम शुरू हो जाता है। लगातार पकड़े जाने के चलते अब इनकी संख्या तेजी से घटने लगी है। बारसूर बाजार में इसे खुलेआम बेचा जाता है।

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बस्तर की कई पर्यावरण समितियां लंबे समय से बोध मछली को बचाने और इसे संरक्षित करने की मांग कर रही हैं, लेकिन बीते 15 साल के दौरान खत्म होने की कगार पर पहुंच चुकी बोध मछली को बचाने की कोई पहल नहीं की गई है।छत्तीसगढ़ वन्यप्राणी संरक्षण सलाहकार समिति के वरिष्ठ सदस्य शरदचंद्र वर्मा ने बताया कि देश में लगभग हर राज्य में वहां की दुर्लभ या लोकप्रिय मछली को राज्य मछली का दर्जा दिया गया है।

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छत्तीसगढ़ में पहाड़ी मैना को राज्यपक्षी, वनभैसा को राज्यपशु, साल को राज्यवृक्ष का दर्जा मिल चुका है, लेकिन राज्य बनने के 17 बाद छत्तीसगढ़ की किसी भी मछली को यह सम्मान नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बोध मछली सिर्फ बस्तर की इंद्रावती नदी में ही पाई जाती है। इसलिए यह विशेष भी है, परंतु अत्यधिक शिकार के चलते इनकी संख्या तेजी से कम हो रही है।
उन्होंने बताया, “संकटग्रस्त बोध मछली को राज्य मछली का दर्जा दिया जाना चाहिए। ऐसा कर इसे संरक्षित और संवर्धित किया जा सकता है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि बोध रक्षा परियोजना तैयार कर इस संकटग्रस्त मछली को बचाने का काम शीघ्र प्रारंभ करे।

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