Home क्राइम फेसबुक के जरिये पकड़ा गया बैडमिंटन अकादमी के कार्यकारी आरोपी निशांत सिन्हा

फेसबुक के जरिये पकड़ा गया बैडमिंटन अकादमी के कार्यकारी आरोपी निशांत सिन्हा

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लखनऊ में गोमती नगर पुलिस को नाबालिग खिलाड़ियों से यौन शोषण के आरोपी बैडमिंटन अकादमी के बर्खास्त कार्यकारी सचिव निशांत सिन्हा का सुराग फेसबुक अपडेट से मिला था। निशांत ने 23 और 24 अप्रैल को दो दिन तक फेसबुक पर अपनी फोटो अपडेट करने के साथ ही कई पोस्ट डाली थीं।

निशांत के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर रख रही पुलिस को फेसबुक अपडेट से ही नोएडा में उसकी लोकेशन मिली और नोएडा पुलिस की मदद से उसे दबोच लिया गया।

बृहस्पतिवार दोपहर पुलिस ने निशांत को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। विवेचक नारद मुनि ने बताया कि निशांत दो महीने से पुलिस को चकमा दे रहा था।

उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की निगरानी की जा रही थी लेकिन लॉगइन नहीं कर रहा था। जैसे ही उसने फेसबुक अकाउंट लॉगइन करके अपडेट किया, साइबर सेल से उसकी लोकेशन निकलवाई गई जो नोएडा में मिली।

पुलिस टीम नोएडा पहुंची और वहां एएसपी दिनेश यादव से संपर्क किया। नोएडा की साइबर सेल ने छानबीन की तो पता चला कि निशांत ने वाई-फाई से फेसबुक लॉग इन किया था।

वाई-फाई कनेक्शन की पड़ताल करते हुए पुलिस नोएडा के सेक्टर-50 पहुंच गई। यहां निशांत अपने रिश्तेदार अशोक पाठक के घर पर छिपा हुआ था। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया और लखनऊ ले आई।

उत्तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन के बर्खास्त कार्यकारी सचिव रिवर बैंक कॉलोनी निवासी निशांत सिन्हा, उसके पिता व बर्खास्त सचिव विजय सिन्हा और करन श्रीवास्तव के खिलाफ के खिलाफ बैडमिंटन अकादमी के मुख्य सुरक्षा अधिकारी जंग बहादुर सिंह ने यौन शोषण व आर्थिक अनियमितताओं के आरोप में रिपोर्ट की थी।

मुकदमा दर्ज होने के बाद से तीनों भागे हुए थे। पुलिस विजय सिन्हा को उनके घर से गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी है।पुलिस ने बताया कि दो महीने से गायब निशांत कंगाल हो चुका था।

बैडमिंटन एसोसिएशन से बर्खास्त होने के बाद से उसकी आय के स्रोत खत्म हो गए थे। बचत के रुपये उसने कोर्ट-कचहरी और वकीलों पर खर्च कर डाले। इसके बाद वह खानाबदोश की जिंदगी बिता रहा था।

पुलिस की पूछताछ में निशांत ने बताया कि दो महीने के दौरान वह कुछ दिन मुंबई में अपने दोस्त शशांक के घर पर रहा। गुड़गांव में एक परिचित के घर पर भी कुछ दिन बिताए।ज्यादातर समय वह दिल्ली और नोएडा में रिश्तेदारों-करीबियों के घर पर छिपा रहा। निशांत के जेल पहुंचते ही उसके करीबी वीआईपी ट्रीटमेंट के लिए जुगाड़ में जुट गए। परिवार के सदस्य कई रसूखदार और प्रभावशाली लोगों को लेकर जेल पहुंचे।

निशांत और उसके पिता विजय सिन्हा को एक साथ एक ही बैरक में रखने के लिए सिफारिश लगाई गई। जेल प्रशासन नहीं माना तो कुछ नेताओं से फोन कराए गए। हालांकि, निशांत की तलाशी के बाद उसे मुलाहिजा बैरक भेज दिया गया।

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