Home उत्तर प्रदेश अस्पतालों में डॉक्टर कर रहे जबरन नसबंदी

अस्पतालों में डॉक्टर कर रहे जबरन नसबंदी

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परिवार नियोजन कार्यक्रम के लक्ष्य की कर रहे पूर्ति
लखनऊ। परिवार नियोजन कार्यक्रम तहत संचालित योजनाओं के तय लक्ष्य की पूर्ती के लिए राजधानी के डॉक्टर अब जबरन महिलाओं की नसबंदी कर रहे हैं। इसका ताजा वाक्या ऐशबाग स्थित बाल महिला चिकित्सालय का है,जहां भर्ती प्रसूता के पति ने बिना अनुमति नसबंदी करने का डॉक्टरों पर आरोप लगाते हुए इसकी लिखित शिकायत मुख्यमंत्री से की।

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बीते सप्ताह वीरांगना अवंतीबाई बाल महिला अस्पताल डफरिन में जनपद बाराबंकी के पिपरौली ग्राम निवासी शिल्पी देवी मौर्या नामक मरीज के पति सुरेश मौर्या ने डॉक्टरों पर पत्नी की जबरन नसबंदी करने का आरोप लगाया था। प्रसूता के पति का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने शिल्पी को पीआईवी नामक जानलेवा बीमारी बताकर उसकी नसबंदी कर दी थी। लेकिन बीमारी से संबंधित कोई जानकारी नहीं दी।

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राजधानी में जनबर नसबंदी करने के यह मात्र दो उदाहरण तो वानगी मात्र हैं किस तरह से परिवार नियोजन के तहत लक्ष्य की पूर्ति करने के लिए अस्पतालों में नसबंदी का खेल चल रहा है। डॉक्टरों का यह खेल शहर के निजी अस्पतालों से लेकर ग्रामीण और सुदूर क्षेत्र के अस्पतालों में भी जारी है। जहां मरीज और उनके परिजनों की मासूमियत का फायदा उठाकर कभी गंभीर बीमारी तो कभी मरीज की जानकारी के बगैर उसकी नसबंदी की जा रही है।

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बीते 17 मई को मेंहदीगंज निवासी पवन कुमार ने अपनी पत्नी नेहा कनौजिया को प्रसव पीड़ा होने पर ऐशबाग बाल महिला चिकित्सालय में भर्ती कराया था। अस्पताल में मौजूद चिकित्सक ने गर्भवती को देखने के बाद तत्काल आपरेशन की जरूरत बताई थी। इस परिजनों ने सहमति जताई थी। पवन कुमार का आरोप है कि आपरेशन के समय ही चिकित्सक ने नसबन्दी कर दी। जिसकी जानकारी उनकों नहीं दी गयी। पवन का कहना है कि उनके कोई बेटी नहीं है।

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चिकित्सक ने की मिठाई की मांग
पवन कुमार ने बताया कि अस्पताल में बच्चे के जन्म के अवसर पर चिकित्सक व एक अन्य कर्मचारी ने विशेष मिठाई की मांग कर डाली और मुझे मिठाई लेने के लिए चौक भेज दिया गया। लेकिन नसबन्दी के बारे में बताया भी नहीं गया।


प्रसूता नेहा कनौजिया की अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा जबरन नसबंदी करने का आरोप निराधार है। प्रसूता के परिजनों को इसकी जानकारी दी गई थी। इसके बाद ही मरीज की नसंबदी की गई। पति डॉॅक्टरों से अभद्रता कर रहा था, इस पर परिजनों ने अस्पताल में सभी के सामने उसकी फटकार भी लगाई थी।
डॉ. मंजू चौरसिया
चिकित्सा अधीक्षक ऐशबाग
बाल महिला अस्पताल एवं नगरीय स्वास्थ्य केंद्र


मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है, मामला अब संज्ञान में आया है इसलिए संबंधित अस्पतालों से जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. जीएस बाजपेई
सीएमओ


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