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केजीएमयू में पिता को कंधे पर उठाकर इलाज के लिए घंटों भटकता रहा बेटा

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लखनऊ। केजीएमयू इलाज कराने आने वाले मरीजों को कोई सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। गुरुवार को स्ट्रेचर न मिलने से विष्णु अपने पिता को कंधे पर उठाकर घंटों भटकता रहा। केजीएमयू प्रशासन मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए एम्बुलेंस, स्ट्रेचर व व्हील चेयर समेत तमाम सुविधाएं मुहैया कराने का दावा करता है पर हकीकत कुछ और ही है। मरीजों को आसानी से स्ट्रेचर भी नहीं मिल पाता है। केजीएमयू के सारे दावे खोखले ही साबित हो रहे हैं।

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बरेली निवासी लालता प्रसाद के पैर में परेशानी है। उनके पैर का मांस गल रहा है। वह अपने आप उठ- बैठ भी नहीं पाते हैं। लालता प्रसाद के बेटे विष्णू कुमार ने बताया कि गुरुवार को वह अपने पिता को डालीगंज स्थित लिम्ब सेंटर लेकर पहुंचे। काफी देर इंतजार के बाद नंबर आया तो डॉक्टरों ने उन्हें केजीएमयू न्यू ओपीडी भेज दिया। रिक्शा कर के किसी तरह वह ओपीडी पहुंचे। यहां भी कोई इलाज नहीं हुआ।

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डॉक्टरों ने लालता को प्लास्टिक सर्जरी विभाग भेज दिया। ओपीडी के बाहर पहुंचकर परिजनों ने स्ट्रेचर की तलाश की। काफी देर ढूढऩे के बाद भी स्ट्रेचर नहीं मिला। अंत में मजबूर होकर विष्णू तपती धूप में अपने पिता को कंधे पर उठाकर चलने लगा। लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। वहीं अमीनाबाद से इलाज कराने आए राजाराम को काफी परेशानी के बाद स्ट्रेचर मिला तो उसका एक पहिया ही टूटा था। राजाराम के पैर में रॉड पड़ी है। काफी मश्क्कत के बाद वह ओपीडी से नीचे उतर सके।

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बाराबंकी निवासी राम औशान अपने 10 वर्षीय बेटे अंकित का इलाज कराने गुरुवार को केजीएमयू ओपीडी आए। पर ओपीडी से पर्चा गायब होने की वहज से अंकित का इलाज नहीं हो सका। बगैर इलाज किए डॉक्टरों ने उसे लौटा दिया। राम औशान ने बताया कि बाराबंकी जिला अस्पताल में दिखाने के बाद डॉक्टरों ने अंकित के फेफड़े में पानी भरने की बात कहकर केजीएमयू रेफर किया है। बच्चे का इलाज कराने सुबह आठ बजे ही वह केजीएमयू पहुंच गए।

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रजिस्ट्रेशन कराने के बाद डॉक्टर को दिखाने के लिए पर्चा चेम्बर में दे दिया। काफी देर इंजतार के बाद भी अंकित का नंबर नहीं आया। कई बार पूछने पर उन्हें डॉक्टरों ने खूब हड़काया। चुपचाप अपनी बारी आने की बात कहकर उसे वहां से भगा दिया। ओपीडी से सभी मरीजों के जाने के बाद भी राम औशान अपने बच्चे को लेकर बैठा रहा। अंत में पूछने पर पता चला कि उनका पर्चा ही गायब हो गया है। अब आज पर्चा आज नहीं बन पाएगा।

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कई बार मिन्नते करने के बाद डॉक्टर ने उसे नहीं देखा। इलाज कराना है तो कल फिर आने की बात कहकर डॉक्टरों ने उसे लौटा दिया। मजूबर होकर राम औशान अपने बच्चे का बगैर इलाज कराए ही वापस लौट आया। उनका कहना है कि पूछने पर पहले ही उसका पर्चा ढूंढा गया होता तो वह दूसरा पर्चा बनवा लेता उसे बिना इलाज न लौटना पड़ता।

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