Home उत्तर प्रदेश कुछ ऐसा है गायत्री प्रजापति का इतिहास

कुछ ऐसा है गायत्री प्रजापति का इतिहास

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साइकिल चोरी से लेकर बलात्कार का मुकदमा दर्ज
लखनऊ/अमेठी। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित रेप केस के आरोपी एवं अखिलेश सरकार के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति फिलहाल राजनीति में यूपी का विवादित नाम बन चुके हैं। गायत्री का हाल नहीं अतीत भी विवादों के साए में गुजरा है। खनन में भ्रष्टाचार या फिर चित्रकूट में महिला के साथ रेप, ये तो गायत्री के राजनीति में आने और मंत्री बनने के बाद की कहानी है। गायत्री जब राजनीति के प्लेटफॉर्म से कोसों दूर रंगाई-पुताई का काम करते थे उस समय उनके विरुद्ध चोरी का मुकदमा दर्ज हुआ था। यही नहीं दबी जुबान में अमेठी के लोग आज उनकी रास लीला की चर्चा करते भी सुने गए।
गायत्री प्रजापति अमेठी के पसरावा गांव के स्व. सुकई प्रजापति के पुत्र हैं। पिता सुकई ने बीते वर्ष 2016 में अपने जीवन की अंतिम सांसे ली। पसरावा गांव अमेठी तहसील से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां आज मातम का माहौल है। इस बीच पूछे जानें पर गांव के लोगों ने बताया कि गायत्री काफी निर्धन परिवार में निवास करते थे। पिता सुकई कुम्हार का काम करते थे जिससे गायत्री के 5 भाई और तीन बहनों का भरण पोषण होता था। ऐसे में जैसे-तैसे गायत्री ने प्राइमरी की शिक्षा गांव के स्कूल में हासिल की और इंटरमीडिएट की परीक्षा राजघराने के अमेठी में बने इंटर कॉलेज से पूरा किया। इसके बाद बीए की पढ़ाई उन्होंने कांग्रेस नेता डॉ. संजय सिंह के पिता के नाम पर स्थापित डिग्री कॉलेज से पूरी की।
घर की वित्तीय स्थित कमजोर और पिता पर परिवार का भार ज्यादा देख गायत्री ने रंगाई-पुताई का काम शुरू किया। इनके साथ गायत्री ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में रंगाई पुताई का काम किया। इसी दौरान उनके विरुद्ध अमेठी के पीपरपुर थाने में चोरी की साइकिल का एक मुकदमा भी दर्ज हुआ।
यहां से गायत्री ने रंगाई-पुताई का काम छोड़ अमेठी में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरु कर दिया। लोगों की मानें तो अक्सर फ्रीडम गाड़ी से गायत्री अमेठी के बस स्टॉप चौराहे पर आकर घंटों बैठते जहां करीब ही में एक मकान में रह रहे लेखपाल अशोक तिवारी से उनकी मुलाकात हो गई। यहां बता दें की अशोक तिवारी मंत्री के साथ रेप के मामले में सह आरोपी हैं जिन्हें पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। अशोक से दोस्ती के बाद गायत्री का प्रॉपर्टी का कारोबार परवान चढऩे लगा। वो ऐसे कि कई सरकारी जमीन पर अशोक से मिल कब्जा कराते रहे। लोगों की मानें तो इस कमाई में गायत्री के पास एक डीआई गाड़ी आ गई जिसका नंबर 303 था।
यहां से गायत्री का ये बिजनेस ऐसे चमका कि राजधानी लखनऊ के शहीद पथ के निकट गायत्री ने 250 बीघे जमीन का सौदा अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह और विकास वर्मा के सहयोग से रायबरेली की एक पार्टीके साथ डील कर डाला। इसी डीलिंग के दौरान राजधानी में ही गायत्री की मुलाकात प्रजापति समाज के अध्यक्ष दयाशंकर प्रजापति से हो गई। जिन्होंने बैक डोर से गायत्री को मुलायम परिवार तक पहुंचा दिया।
साल 1994 में उन्होंने सपा का दामन थामा। निष्ठा को देखते हुए उन्हें युवजन सभा के प्रदेश सचिव का पद तक दिया गया। साल 1996 में अमेठी से पहली बार सपा के सिंबल पर चुनाव लडऩे का भी मौका मिला लेकिन नतीजे में हार ही उनके हाथ लगी। इस हार के बाद उन्होंने एक दशक तक जमीन का ही काम किया और 2012 में धन-बल और सपा की लहर में चुनाव जीतकर वो विधानसभा पहुंच गए। जहां पहले उन्हें सिंचाई और बाद में कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए खनन औरकाफी विवादों के बाद परिवहन मंत्री बनाया गया। विवादों में घिरे करोड़ों के मालिक गायत्री प्रजापति पर बीपीएल कोटे की सुविधाएं लेना का भी आरोप लगा है। आरोप ये भी है की गायत्री ने अपनी बेटी को गलत तरीके से कन्या विद्या धन दिलाया। कन्या विद्या धन केवल गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली लड़कियों के लिए था। गायत्री प्रजापति के बेटे अनुराग प्रजापति पर अमेठी में सरकारी जमीन कब्जाने और एक महिला के अपहरण का भी आरोप लगा था। गायत्री प्रजापति पर लखनऊ में ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर प्लॉट बेचने का आरोप भी है। अमेठी में एक बेसहारा महिला ने भी गायत्री प्रजापति पर अपनी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया था।
लखनऊ पुलिस ने गायत्री के बेटे अनुराग को गिरफ्तार किया था। गायत्री के दो बेटे हैं और दो बेटियां। इन दो बेटों के नाम 20 से ज्यादा कंपनियां हैं, जिसमें वे अरबों रुपए के मालिक हैं। दोनों बेटों की पढ़ाई अमेठी में ही हुई है। दोनों ने बीए किया है। बड़ा बेटा अनुराग पिता के साथ ही कमीशन एजेंट के तौर पर काम करने लगा था। अनुराग पर भी अमेठी की रहने वाली एक लड़की ने 2014 में रेप का आरोप लगाया था। उसके खिलाफ कार्रवाई करने की कई सफिारिशें की गईं लेकिन गायत्री की हनक के चलते पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की। बताया जाता है कि बाद में परिवार पर दबाव बनाकर लड़की को शांत कराया गया।

 

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