Home खबरें हटके ’जिल्लत की जिंदगी जीने से बेहतर है बंदूक उठाना’

’जिल्लत की जिंदगी जीने से बेहतर है बंदूक उठाना’

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नई दिल्ली। ’धरती का स्वर्ग’ कहे जाने वाले कश्मीर के लोगों में सरकार विश्वास पैदा करने को लेकर हरसंभव प्रयत्न कर रही है, लेकिन कुछेक घटनाएं ऐसी घट जाती हैं, जिनसे सारे प्रयासों पर पानी फिर जाता है। एक ऐसे ही मामले में कश्मीर के एक छात्र ने कहा है कि सुरक्षाबलों द्वारा उन्हें आतंकवादी के रूप में देखे जाने और ’जिल्लत की जिंदगी जीने से बेहतर’ है कि वे बंदूक उठा लें।

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पंजाब में हथियार रखने के शक में पुलिस की छापेमारी और उसके बाद दो मित्रों के साथ किराये के मकान से निकाले जाने के बाद आक्रोशित एक कश्मीरी छात्र का कहना है कि पुलिस द्वारा उन्हें ’देश के लिए खतरा’ समझे जाने की जिल्लत से बेहतर है कि वे बंदूक उठा लें।
पंजाब पुलिस ने हालांकि उत्पीड़न के आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि तलाशी नियमित अभियान का हिस्सा था।

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25 वर्षीय तजामुल इमरान दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिले के निवासी हैं, जो फिलहाल आतंकवादियों का गढ़ साबित हो रहा है और यहां सुरक्षाबलों ने चार मई को आतंकवादियों की तलाशी के लिए एक व्यापक अभियान चलाया था। टेलीफोन पर आईएएनएस से बातचीत करते वक्त इमरान सुबक पड़ते हैं।
इमरान ने कहा, “उन्होंने हमें हथियार बाहर निकालने को कहा। मुझे लगा कि पुलिसकर्मी मजाक कर रहे हैं।“ मोहाली के निकट जिरकपुर में रविवार सुबह किराये के एक फ्लैट में उन्होंने तीन घंटे के ’उत्पीड़न’ को याद किया, जिस दौरान तीन कश्मीरी छात्रों के साथ ज्यादती की गई।

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उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने पूरे घर की तलाशी ली और वे हमसे बार-बार पूछ रहे थे कि हमने कश्मीर से लाए गए विस्फोटकों व हथियारों को कहां छिपाया है।
इमरान ने कहा, “हम इतना डर गए थे कि मेरे मित्रों को और मुझे लगने लगा था कि वे हमें जान से मार डालेंगे और इसे मुठभेड़ दिखा देंगे।“
उन्होंने कहा, “सुबह के 5.40 बज रहे थे और हम सो रहे थे। दो पुलिसकर्मियों ने दरवाजे पर दस्तक दी। मैंने देखा कि कम से कम 15 से 16 पुलिसकर्मियों ने मकान की घेराबंदी कर रखी थी।“
ऑल इंडिया जम्मू एवं कश्मीर छात्र संघ के अध्यक्ष इमरान ने कहा कि उनके व्यवहार से ऐसा लग रहा था कि वे हमें लगभग आतंकवादी ही समझ रहे हैं।
पंजाब प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से नवंबर में एमबीए करने वाले इमरान को कॉलेज में प्लेसमेंट सत्र का इंतजार है।

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उन्होंने कहा, “लेकिन घटना के बाद मुझे नहीं लगता कि मैं देश के किसी भी हिस्से में काम कर सकता हूं। हम भयभीत हैं। मुझे अपने घर लौटना है। मेरा परिवार मुझे पंजाब में ठहरने की अनुमति नहीं दे रहा है।“
इमरान ने कहा कि पुलिस ने उनके मकान मालिक को उन्हें घर से निकाल बाहर करने को कहा और मकान मालिक ने बिना कोई वक्त गंवाए ऐसा किया।
कश्मीरी छात्र ने कहा, “पुलिस ने मकान मालिक से कहा कि अगर जिरकपुर इलाके में कोई भी घटना घटती है, तो उसके लिए वही जिम्मेदार होंगे, क्योंकि उन्होंने कश्मीरियों को किराए पर मकान दिया है।“ उन्होंने कहा कि मकान खाली कर उन्हें अपने मित्र के घर में पनाह लेनी पड़ी।
छात्र ने कहा कि उन्होंने जम्मू एवं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के शिकायत निगरानी पोर्टल से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

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इमरान ने कहा, “एक छात्र कार्यकर्ता होने के नाते, मैं कश्मीरी छात्रों से उत्पीड़न की कई घटनाओं के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के कश्मीरी छात्रों की निगरानी शाखा को अवगत करा चुका हूं, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।“
पंजाब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हालांकि इस बात से इनकार किया है कि छात्रों के साथ उत्पीड़न किया गया और कहा कि पुलिस इलाके में नियमित जांच को अंजाम दे रही थी। मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह ने आईएएनएस से कहा, “किसी के साथ बिल्कुल भी उत्पीड़न नहीं हुआ। हम तो जानते भी नहीं थे कि वे कश्मीरी हैं। हम शहर के बाहरी इलाके में नियमित जांच कर रहे थे।“
सिंह ने यह भी कहा कि पुलिस ने मकान मालिक को छात्रों को फ्लैट से बाहर निकालने के लिए कभी नहीं कहा। उन्होंने कहा कि छात्र बिना बात का मुद्दा बना रहे हैं।

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